एआई-सहायित “फ़र्ज़ी पहचान” वाले अभियानों पर रोक
पिछले ढाई वर्षों में हमने दुर्भावनापूर्ण लोगों के उन कई तरीकों पर रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिनसे उन्होंने साइबर हमलों, गुप्त प्रभाव अभियानों, धोखाधड़ी और हमारी उपयोग नीतियों के अन्य उल्लंघनों के लिए हमारे मॉडलों का इस्तेमाल करने की कोशिश की. हम ये रिपोर्टें नियामकों, उद्योग के सहयोगियों और व्यापक समाज को यह बताने के लिए प्रकाशित करते हैं कि दुर्भावनापूर्ण लोग हमारी नज़र में एआई का फ़ायदा कैसे उठाने की कोशिश कर रहे हैं. हम उन कमज़ोरियों को भी उजागर करना चाहते हैं जिनका वे दुरुपयोग करते हैं.
हमने हाल में दो प्रभाव अभियानों पर प्रतिबंध लगाया—एक रूस से और एक ईरान से. उन्होंने जटिल “मुखौटा” संस्थाओं को सहारा देने के लिए हमारे मॉडलों के साथ पारंपरिक तरीकों और तकनीकों का इस्तेमाल किया. इन संस्थाओं के ज़रिए उन्होंने भू-राजनीति और संघर्ष संबंधी संदेशों का असली स्रोत छिपाकर उन्हें अपने लक्षित लोगों तक पहुँचाया. ईरानी अभियान में सात “पत्रकारों” की फ़र्ज़ी पहचानें थीं, जिनके ज़रिए वह दुनिया भर के छोटे और मध्यम ऑनलाइन प्रकाशनों को लंबे लेख छापने के प्रस्ताव भेजता था. रूसी अभियान ने लगता है कि लैटिन अमेरिका में अनजान लोगों को अपने साथ जोड़कर वहाँ एक “नीति-अनुसंधान संस्थान” चलाया.
दोनों अभियान कई स्तरों पर सक्रिय थे और अपने लक्ष्य पाने के लिए अलग-अलग रणनीतियाँ आज़मा रहे थे. लंबे लेखों के अलावा, ईरानी अभियान ने सोशल मीडिया के लिए एक साथ कई टिप्पणियाँ बनाईं, जो आम तौर पर अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़े विषयों पर थीं. “नीति-अनुसंधान संस्थान” को नियंत्रित करने के अलावा रूसी अभियान ने फ़र्ज़ी “लीक हुए” दस्तावेज़ और ऑडियो की पटकथाएँ बनाईं, जिनमें से कुछ हमें ऑनलाइन फैलती मिलीं. दोनों अभियानों ने आंतरिक रिपोर्टें बनाने के लिए भी एआई का बड़े पैमाने पर उपयोग किया (रूसी अभियान ने सबसे ज़्यादा यही किया). दोनों में शामिल लोगों ने संचालकों की प्रभावशीलता बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए संदिग्ध या सरासर छलपूर्ण तरीके अपनाए.
इन अभियानों की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि वे एआई से पहले के दौर के जटिल प्रभाव अभियानों से बहुत मिलते-जुलते थे, लेकिन कुछ कार्य-प्रक्रियाएँ आसान करने के लिए एआई का उपयोग करते थे. ईरानी अभियान की पत्रकार पहचानें फ़र्ज़ी पत्रकार “ऐलिस(एक नई विंडो में खुलेगा) डोनोवन(एक नई विंडो में खुलेगा)” जैसी थीं. यह रूसी सैन्य खुफ़िया तंत्र की आड़ थी, जिसके लेख 2016-17 में कई पश्चिमी प्रकाशनों ने छापे थे. 2020 में रूसी इंटरनेट रिसर्च एजेंसी की पिछली गतिविधियों से जुड़े लोगों ने “पीसडेटा(एक नई विंडो में खुलेगा)” नाम का फ़र्ज़ी “समाचार” प्रकाशन चलाया. उसने दुनिया भर के अनजान पत्रकारों को अपने लिए लिखने में लगा लिया.
ये अभियान अपनी संभावित पहुँच के लिहाज़ से भी असामान्य थे. प्रभाव अभियानों को 1 (सबसे कम) से 6 (सबसे अधिक) तक आँकने वाले प्रसार पैमाने(एक नई विंडो में खुलेगा) के आधार पर हम रूस से चल रहे अभियान को श्रेणी 5 में रखेंगे. अपनी रिपोर्टिंग शुरू करने के बाद यह पहला श्रेणी 5 अभियान है जिसे हमने बाधित किया है. ईरान से चल रहा अभियान श्रेणी 4 तक पहुँचा. दोनों अपनी सामग्री को केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय मुख्यधारा के मीडिया में छपवाने में सफल रहे. यह सारी सामग्री हमारे मॉडलों से नहीं बनी थी. यह उस रुझान से मेल खाता है जो हमने पिछले ढाई वर्षों में उजागर किए 30 गुप्त प्रभाव अभियानों में देखा है: फ़र्ज़ी सोशल मीडिया प्रसार पर निर्भर रहने के बजाय असली मीडिया प्रकाशनों में सामग्री छपवाने की कोशिश करने वाले अभियानों की संभावित पहुँच और प्रभाव आम तौर पर सबसे अधिक होते हैं.

2024 की शुरुआत से हमारे द्वारा उजागर 30 प्रभाव अभियानों की सारणी. आकलन मुख्य प्रसार माध्यम (सोशल मीडिया, अभियान की अपनी वेबसाइट, बाहरी प्रकाशन) और प्रसार पैमाने के अंक के आधार पर है. एक से अधिक माध्यम अपनाने वाले अभियानों—जैसे वेबसाइट चलाना और सोशल मीडिया पर उसका प्रचार करना—को उस माध्यम में रखा गया है जो अभियान का मुख्य आधार लगा.
एआई ऐसे मुखौटा अभियानों को बड़े पैमाने पर काम करने, अधिक दक्षता, भाषा में सहजता और बेहतर संपादकीय क्षमता हासिल करने में मदद कर सकता है. संचालक इन फ़ायदों से अनजान कर्मचारियों या संपादकों का शोषण कर सकते हैं और अपनी सामग्री उन लोगों तक पहुँचा सकते हैं जिन्हें पता ही नहीं होता कि उसके पीछे कौन है या उसका मकसद क्या है. ये अभियान यह भी दिखाते हैं कि दुर्भावनापूर्ण लोग अपने लक्ष्य पाने के लिए कितनी जटिल और सोची-समझी तरह से फ़र्ज़ी पहचानों और संस्थाओं का उपयोग करते हैं. संगठनों की सुरक्षा मज़बूत बनाए रखने के लिए यह समझना ज़रूरी होगा कि दुर्भावनापूर्ण लोग किन कमज़ोरियों का फ़ायदा उठाते हैं और उनसे उन्हें दर्शक तथा पहुँच कैसे मिलती है.
लेकिन इन मुखौटा अभियानों का गुप्त होना ही उन्हें ज़िम्मेदारी से किए गए खुलासे के सामने खास तौर पर कमज़ोर भी बनाता है. पर्दाफ़ाश होने के बाद “ऐलिस डोनोवन” और “पीसडेटा”, दोनों की गतिविधियाँ बंद हो गईं. इसलिए इन मुखौटा अभियानों की रिपोर्टिंग का हमारा लक्ष्य आगे का शोध और उन्हें रोकने का काम आसान बनाना है—और अभियानों को जारी रखना कठिन बनाना है.
रूस से जुड़े लोग, जो लैटिन अमेरिका भर में प्रभाव अभियान चला रहे थे.
हमने रूस से चलाए जा रहे ChatGPT खातों के एक समूह पर प्रतिबंध लगाया. उन्होंने लैटिन अमेरिका के देशों को निशाना बनाने वाले गुप्त प्रभाव अभियानों से जुड़े कई कामों के लिए ChatGPT का उपयोग किया. अधिकांश गतिविधियों का मकसद इस क्षेत्र में यूक्रेन की साख बिगाड़ना लगता था, लेकिन कुछ का उद्देश्य स्थानीय राजनीतिक नतीजों को प्रभावित करना था, खासकर अर्जेंटीना और बोलीविया में. ज़्यादातर संचालक रूसी में निर्देश देते थे; एक स्पेनी में निर्देश देता था, लेकिन वह भी रूस में ही स्थित लगता था. हमने इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों के साथ साझा की है.
संचालकों ने ChatGPT से तीन मुख्य काम करवाए: अपनी गतिविधियों पर आंतरिक रिपोर्टें लिखना (और दूसरों की उन गतिविधियों पर भी जिनका श्रेय वे विश्वसनीय ढंग से ले सकें), अपने अभियानों की सामग्री बनाना, और लैटिन अमेरिका के सामाजिक अनुसंधान केंद्र (एसआरसी) नामक स्वघोषित “अनुसंधान मंच” के प्रदर्शन पर रिपोर्टें तैयार करना. लगता है कि उन्होंने “मिया क्लार्क” नाम की फ़र्ज़ी पहचान से एसआरसी को नियंत्रित किया; इसी नाम के आधार पर हमने अभियान को “डार्क क्लार्क” कहा है. हम रूस से अपने मॉडलों के उपयोग की अनुमति नहीं देते, इसलिए उन्होंने हमारी सेवाओं से जुड़ने के लिए वीपीएन इस्तेमाल किए.
अपनी आंतरिक रिपोर्टों में संचालकों ने यूक्रेन या स्थानीय नेताओं की साख कमज़ोर करने के लिए लैटिन अमेरिका भर में फ़र्ज़ी खबरें फैलाने का दावा किया. इनमें से कुछ फ़र्ज़ी खबरों को सार्वजनिक स्रोतों के(एक नई विंडो में खुलेगा) शोधकर्ताओं(एक नई विंडो में खुलेगा) ने “पोलिटोलॉजी” या “ला कॉम्पानिया” नामक रूसी संस्था से जोड़ा है. बताया जाता है कि यह वैगनर समूह और रूसी धनकुबेर येवगेनी प्रिगोझिन की स्थापित अन्य संस्थाओं की उत्तराधिकारी है. संचालकों ने हमारे मॉडलों से पोलिटोलॉजी और वैगनर पर सार्वजनिक रिपोर्टों का अनुवाद या व्याख्या भी माँगी—रूस से जुड़े किसी अन्य नेटवर्क के बारे में पूछने से कहीं अधिक.
यह अभियान दो मायनों में असामान्य था. पहला, लगता है कि उसने लैटिन अमेरिका के लोगों को एसआरसी के लिए काम करने में सफलतापूर्वक लगा लिया था. एसआरसी पर रूसी संचालकों की रिपोर्टों में वेतनमान, भर्ती और बर्खास्तगी जैसे फ़ैसलों का ज़िक्र था. इससे संकेत मिलता है कि वे संस्था के साथ सहयोग नहीं, बल्कि उसे नियंत्रित कर रहे थे. उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि लैटिन अमेरिका में एसआरसी के कर्मचारियों को पता नहीं था कि वे रूसी समूह के लिए काम कर रहे हैं. रूस से जुड़े उस अन्य “नीति-अनुसंधान संस्थान” के विपरीत, जिसका हमने हाल में पर्दाफ़ाश किया, लगता है कि एसआरसी ने अपने साथ जोड़े गए कर्मचारियों से अधिकांश सामग्री मौलिक रूप से तैयार करवाई. पिछले ढाई वर्षों में हमने फ़र्ज़ी पहचान की आड़ में काम करने की जितनी कोशिशों को बाधित किया, यह उनमें सबसे जटिल थी.
दूसरा, कुछ सार्वजनिक साक्ष्य बताते हैं कि डार्क क्लार्क की फ़र्ज़ी सामग्रियाँ इतनी फैलीं कि उनकी तथ्य-जाँच(एक नई विंडो में खुलेगा) करनी पड़ी और आधिकारिक खंडन(एक नई विंडो में खुलेगा) जारी हुए. यह पिछले दो वर्षों में हमारे द्वारा बाधित किसी भी प्रभाव अभियान से अधिक व्यापक पहुँच का संकेत है. अभियान ने पेरू में जिस एक फ़र्ज़ी खबर को फैलाने का दावा किया, उसने यूक्रेन और पोलैंड के बीच सार्वजनिक तनाव बढ़ाने में भी योगदान दिया.
संचालकों ने ChatGPT का मुख्य उपयोग किसी अज्ञात वरिष्ठ को भेजी जाने वाली आंतरिक रिपोर्टें तैयार करने और अद्यतन करने में किया. इन नियमित रिपोर्टों में लैटिन अमेरिका भर में गुप्त प्रभाव अभियान चलाने की कोशिशों का वर्णन था. इनमें तीन मुख्य कार्यक्षेत्र थे: यूक्रेन को बदनाम करना और यूक्रेनी सशस्त्र बलों की भर्ती कमज़ोर करना; कुछ देशों, खासकर बोलीविया और अर्जेंटीना की घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप करना; और एसआरसी का प्रबंधन. अधिकांश मामलों में हमने दुर्भावनापूर्ण लोगों को हमारे मॉडलों से अभियानों की सामग्री बनाते नहीं, केवल उन पर रिपोर्टें लिखते देखा (कुछ अपवादों का वर्णन नीचे है).
रिपोर्टों में रणनीतियों का भरपूर विवरण था. उनसे पता चलता है कि अभियान ने यूक्रेन और कुछ राष्ट्रीय नेताओं, खासकर अर्जेंटीना, बोलीविया और इक्वाडोर के राष्ट्रपतियों को कैसे कमज़ोर करने की कोशिश की. कुछ में स्थानीय लोगों को धोखे से ऐसे कामों में लगाने की कोशिशों का वर्णन था, जिन्हें संचालक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकें. अन्य में फ़र्ज़ी “लीक” का ज़िक्र था जिन्हें फैलाने का संचालकों ने दावा किया.
दो मामलों में साक्ष्य संचालकों को “पोलिटोलॉजी” पर सार्वजनिक रिपोर्टों से जोड़ते हैं. संचालकों ने बताया कि 2024 में उन्होंने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति हावियर मिलेई को निशाना बनाकर दो अभियान चलाए. पहले में, उनके मुताबिक, उन्होंने यह झूठी खबर फैलाई कि मिलेई ने अपने कुत्तों के लिए कार्टियर के रत्नजड़ित पट्टे खरीदे थे. दूसरे में, उन्होंने दावा किया कि ब्यूनस आयर्स में मिलेई-विरोधी दीवार लेखन के लिए स्थानीय लोगों को पैसे दिए. लीक हुए दस्तावेज़ों के आधार पर इन दोनों दावों को सार्वजनिक रूप से(एक नई विंडो में खुलेगा) “पोलिटोलॉजी” और “ला कॉम्पानिया” से जोड़ा गया है(एक नई विंडो में खुलेगा).
कई अन्य फ़र्ज़ी सामग्रियों का संबंध पहले रूसी प्रभाव अभियानों से नहीं जोड़ा गया था. मिसाल के तौर पर, संचालकों ने दावा किया कि मई 2026 में उन्होंने पेरू के लीमा स्थित क्षेत्रीय शिक्षा निदेशालय के नाम पर एक फ़र्ज़ी ईमेल पता बनाया. इससे उन्होंने ज़िले के स्कूलों को राष्ट्रीय सांस्कृतिक और भाषाई विविधता दिवस (21 मई) पर यूक्रेन को समर्पित कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए. ईमेल में अन्य लोगों के साथ बीसवीं सदी के विवादित यूक्रेनी राष्ट्रवादी स्तेपान बांदेरा का उल्लेख करने के स्पष्ट निर्देश थे. कुछ यूक्रेनी उन्हें स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा व्यक्ति मानते हैं, लेकिन रूस और पोलैंड में उन्हें फ़ासीवाद, युद्धकाल में दुश्मन से सहयोग और अत्याचारों से जोड़ा जाता है. संचालकों के अनुसार, कुछ स्कूलों ने फ़र्ज़ी ईमेल पते पर जवाब देकर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की पुष्टि की और तस्वीरें भी भेजीं.
इसके बाद संचालकों ने दावा किया कि उन्होंने पेरू और पोलैंड के मीडिया में इन कार्यक्रमों की खबरें छपवाईं. साथ ही यह आरोप भी फैलाया कि यूक्रेन अति-राष्ट्रवादी विचारधाराओं का “निर्यात” कर रहा है, जिससे आक्रोश भड़का. सार्वजनिक स्रोतों की खोज में इस दावे से मेल खाती खबरें पेरू(एक नई विंडो में खुलेगा) और(एक नई विंडो में खुलेगा) पोलैंड के(एक नई विंडो में खुलेगा) प्रेस(एक नई विंडो में खुलेगा) और हंगरी(एक नई विंडो में खुलेगा) के एक अंग्रेज़ी प्रकाशन में मिलीं (कुछ लेख अब हटा दिए गए हैं). कुछ(एक नई विंडो में खुलेगा) लेखों(एक नई विंडो में खुलेगा) में यूरोपीय संसद के एक पोलिश सदस्य की प्रतिक्रिया थी. उन्होंने प्रस्ताव रखा कि “पोलैंड-विरोधी रवैया” दिखाने वालों को पोलैंड में अवांछित व्यक्ति घोषित किया जाए. इस तरह रूसी फ़र्ज़ीवाड़े ने यूक्रेनियों और पोलिश लोगों के ऐतिहासिक तनावों का फ़ायदा भी उठाया और उन्हें बढ़ाया भी.
इसी तरह जून में संचालकों ने दावा किया कि उन्होंने एक अन्य फ़र्ज़ी ईमेल पते से इक्वाडोर के स्कूलों को धोखे में रखकर ऐसा समारोह करवाया जिसमें राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ और निजी सैन्य ठेकेदार कंपनी ब्लैकवॉटर के पूर्व प्रमुख एरिक प्रिंस के प्रति निष्ठा की शपथ ली गई. संचालकों ने दावा किया कि इस घटना से इक्वाडोर में आक्रोश फैला और सरकार पर फ़र्ज़ी दावे का खंडन करने का दबाव पड़ा, जिससे वह देश भर के लोगों तक पहुँच गया. इस बार भी सार्वजनिक स्रोतों के शोध में इक्वाडोर के(एक नई विंडो में खुलेगा) प्रेस(एक नई विंडो में खुलेगा) में इस दावे से काफ़ी मेल खाती मीडिया(एक नई विंडो में खुलेगा) रिपोर्टें(एक नई विंडो में खुलेगा) मिलीं. इक्वाडोर की शिक्षा मंत्री का विस्तृत खंडन(एक नई विंडो में खुलेगा) भी मिला.
संचालकों ने अपनी झूठी खबरों को विश्वसनीय बनाने के लिए कई तकनीकें अपनाईं. उनकी आंतरिक रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने मार्च में इक्वाडोर को निशाना बनाने वाली दो अलग-अलग फ़र्ज़ी सामग्रियाँ फैलाईं. एक में इक्वाडोर में यूक्रेन के वाणिज्यदूत के नाम से फ़र्ज़ी ऑडियो इस्तेमाल किया गया. इसमें दावा था कि उन्होंने इक्वाडोर के लोगों के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं. हमारी सार्वजनिक स्रोतों की जाँच में टिकटॉक पर ठीक इसी दावे से मेल खाती एक पोस्ट मिली; उस पर लोगों की प्रतिक्रिया सीमित दिखी. दूसरे में एक असली समाचार चैनल के लोगो के साथ एक्स और टिकटॉक पर फैलाए गए फ़र्ज़ी वीडियो का ज़िक्र था. इसमें आरोप था कि नोबोआ सरकार युवकों को यूक्रेन में लड़ने के लिए भर्ती कर रही थी. इक्वाडोर के तथ्य-जाँचकर्ताओं(एक नई विंडो में खुलेगा) ने अप्रैल की शुरुआत में इस विवरण से मेल खाते एक अभियान का वर्णन किया.

8 अप्रैल, 2026 को पोस्ट किया गया टिकटॉक वीडियो. इसमें यूक्रेनी वाणिज्यदूत के नाम से फ़र्ज़ी ऑडियो है, जिसे बनाने का दावा इस अभियान ने किया था.
एक अन्य आंतरिक रिपोर्ट में उस फ़र्ज़ी सामग्री का वर्णन था जिसे उन्होंने मई के अंत में बोलीविया में फैलाया, जब सरकार-विरोधी प्रदर्शन चरम पर थे. संचालकों ने स्पष्ट कहा कि इस अभियान का लक्ष्य प्रदर्शनों से जुड़े संकट को और गहराना था. अभियान में सरकारी जल कंपनी ईपीएसएएस के एक कर्मचारी की फ़र्ज़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग थी. इसमें कहा गया कि सरकार प्रशासनिक राजधानी ला पाज़ की पानी की आपूर्ति रोकने और आपातकाल घोषित करने वाली है. हमारे सार्वजनिक स्रोतों के शोध में इसी दावे को झूठा साबित करने वाली रिपोर्ट(एक नई विंडो में खुलेगा) और ईपीएसएएस का आधिकारिक खंडन(एक नई विंडो में खुलेगा) मिला.
अन्य आंतरिक रिपोर्टों में ऐसी फ़र्ज़ी सामग्रियाँ थीं जिनकी पुष्टि हम सार्वजनिक स्रोतों से नहीं कर सके. संभव है कि उन्हें पहले ही हटा दिया गया हो या वे फैल न पाई हों. मिसाल के तौर पर, संचालकों ने जनवरी में एक खबर फैलाने का दावा किया जिसमें आरोप था कि यूक्रेनी दूतावास के प्रतिनिधियों ने ब्राज़ील की एक प्रभावक और मॉडल की तस्करी करके उसे यूक्रेन पहुँचाया, जहाँ कीव में उसकी हत्या कर दी गई. जून में उन्होंने बोलीविया में एक और फ़र्ज़ी ऑडियो फैलाने का दावा किया. इस बार कथित तौर पर बोलीविया के केंद्रीय बैंक का एक कर्मचारी चेतावनी दे रहा था कि बैंक नकद निकासी सीमित करने वाला है. उन्होंने देश की हाइड्रोकार्बन एजेंसी के नाम से एक फ़र्ज़ी पत्र फैलाने का भी दावा किया, जिसमें निजी कारों के लिए ईंधन बिक्री पर पाबंदियों की चेतावनी थी.
अन्य रिपोर्टों में संचालकों ने हमारे मॉडलों से लक्षित देशों की ऐसी घटनाएँ ढूँढने में मदद माँगी जिनका श्रेय वे ले सकें, भले ही उनमें उनकी कोई भूमिका न रही हो. मिसाल के तौर पर, अर्जेंटीना में संचालकों ने दावा किया कि अर्जेंटीना के विदेश मंत्री ने फ़ॉकलैंड / माल्विनास द्वीपों पर संयुक्त राष्ट्र समिति की बैठक में उनके अभियान की बातें उद्धृत की थीं. संचालकों ने ये तर्क फैलाने का श्रेय लिया कि आत्मनिर्णय का सिद्धांत इन द्वीपों पर लागू नहीं होता और ब्रिटेन ने वहाँ ज़रूरत से कहीं ज़्यादा सैन्य बल तैनात कर रखा है. दरअसल, दोनों तर्क कई(एक नई विंडो में खुलेगा) वर्षों(एक नई विंडो में खुलेगा) से अर्जेंटीना के आधिकारिक रुख का हिस्सा रहे हैं. इसी तरह जून में ब्राज़ील के मीडिया ने एक ब्राज़ीली नागरिक का मामला प्रकाशित किया(एक नई विंडो में खुलेगा). वह सेना में शामिल होने यूक्रेन गया था, रूसी सेना ने उसे पकड़ लिया और फिर उसने टेलीविज़न पर दिए बयान में दावा किया कि उसे धोखे से लड़ाई में शामिल किया गया था. ChatGPT इस्तेमाल करने वाले संचालकों ने दावा करने की कोशिश की कि इस रिपोर्ट ने उनके अभियान का संदेश दोहराया था; वास्तव में, उसने बंदी के अपने वीडियो को उद्धृत किया था(एक नई विंडो में खुलेगा). इससे संकेत मिलता है कि संचालक बाहरी लोगों के बजाय अपने ही नियोक्ताओं को प्रभावित करने का अभियान चला रहे थे.
संचालकों की कुछ रिपोर्टों में सामाजिक अनुसंधान केंद्र नाम के एक स्वघोषित “अनुसंधान मंच” का ज़िक्र था (रूसी नाम का अर्थ: समाजशास्त्रीय अनुसंधान केंद्र). एसआरसी की वेबसाइट के अनुसार, उसका ध्यान लैटिन अमेरिका में भारतीय प्रवासियों और भारत तथा इस क्षेत्र के देशों के संबंधों पर है.
आंतरिक रिपोर्टों से संकेत मिला कि संचालक इस नीति-अनुसंधान संस्थान के साथ केवल काम नहीं कर रहे थे, बल्कि उसे नियंत्रित कर रहे थे. मिसाल के तौर पर, उन्होंने भर्ती और बर्खास्तगी के फ़ैसलों, वेतनमान, कर्मचारी-नियोजन और चल रही शोध परियोजनाओं का उल्लेख किया. खास बात यह थी कि रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि संचालकों ने अभियान की सोशल मीडिया गतिविधियाँ चलाने और लैटिन अमेरिका के स्थानीय कर्मचारियों से संपर्क रखने के लिए “मिया क्लार्क” नाम की फ़र्ज़ी पहचान बनाई थी. उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि इन स्थानीय कर्मचारियों को पता ही नहीं था कि वे रूसी अभियान के लिए काम कर रहे हैं, और वे ईमानदारी से शोध कार्य कर रहे थे. अनजान लोगों को इस तरह मध्यस्थ बनाना, प्रिगोझिन के नेटवर्क से जुड़े पुराने रूसी अभियान “पीसडेटा” से काफ़ी मिलता-जुलता है, जिसका मेटा ने 2020 में पर्दाफ़ाश किया था(एक नई विंडो में खुलेगा).
रूसी संचालकों की रिपोर्टों के मुताबिक, लैटिन अमेरिका में उनके स्थानीय कर्मचारी पूरे क्षेत्र के विशेषज्ञों और टिप्पणीकारों के साक्षात्कार लेते थे और निष्कर्षों के आधार पर शोधपत्र तैयार करते थे. विषयों में ब्रिक्स समूह पर जनमत का व्यापक विश्लेषण और राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो तथा लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के कार्यकालों में ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था की विस्तृत तुलना शामिल थी. कभी-कभी रूसी संचालक शोध परियोजनाओं के प्रकाशित होने से पहले ही उनकी प्रगति रिपोर्ट तैयार कर देते थे. यह सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया में उनकी करीबी भागीदारी का संकेत है. हमें एसआरसी की वेबसाइट पर 60 से काफ़ी अधिक लेख मिले, जिनमें से अधिकांश मौलिक रचनाएँ लगते थे. यह डार्क क्लार्क को रूस से चल रहे उस अभियान से अलग बनाता है जिसका हमने हाल में पर्दाफ़ाश किया था. वह भी आड़ के तौर पर नीति-अनुसंधान संस्थान चलाता था, लेकिन उसकी अधिकांश सामग्री चुराई हुई थी. इससे अधिक टिकाऊ मुखौटा संस्था बनाने की मंशा झलकती है, जिसके संपर्क पूरे लैटिन अमेरिका में हों.
एसआरसी के काम का प्रचार करने के लिए रूसी संचालकों ने सोशल मीडिया खातों और पेजों का एक नेटवर्क बनाने की कोशिश का दावा किया. उनकी रिपोर्टों के अनुसार, जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद संचालकों ने उन्हीं खातों में प्रवेश करने की कोशिश की, तो खातों पर पाबंदियाँ लग गईं और सोशल मीडिया गतिविधियों में बाधा आई. सार्वजनिक रिकॉर्ड में इसके निशान दिखते हैं. मिसाल के तौर पर, एक्स पर एसआरसी के मुख्य खाते की पारदर्शिता सेटिंग में स्थान जर्मनी था (संभवतः वीपीएन के उपयोग के कारण), लेकिन वह रूसी संघ के ऐप स्टोर से जुड़ा था. वहीं उसके एक इंस्टाग्राम खाते की पारदर्शिता सेटिंग में व्यवस्थापक का स्थान वेनेज़ुएला था. हमें मिले एसआरसी की पहचान वाले तीन फ़ेसबुक खातों में से किसी के भी इतने अनुयायी नहीं थे कि व्यवस्थापक का स्थान दिखाने वाली सेटिंग सक्रिय हो सके.

बाईं ओर, सामाजिक अनुसंधान केंद्र से जुड़ा एक्स खाता. पारदर्शिता सेटिंग पर ध्यान दें, जो खाते का रूसी संघ के ऐप स्टोर से जुड़ना दिखाती है. दाईं ओर, एसआरसी का इंस्टाग्राम खाता: स्थान वेनेज़ुएला दिखने पर ध्यान दें.
संचालकों ने लिंक्डइन पर खास समस्याएँ बताईं. उनके मुताबिक, उन्होंने एसआरसी का प्रतिनिधित्व करने के लिए जानबूझकर फ़र्ज़ी खाता बनाया, लेकिन उसके लिए नेटवर्क बनाना कठिन रहा. उनकी रिपोर्टों के अनुसार, समाधान यह था कि और फ़र्ज़ी खाते बनाए जाएँ जो पहले खाते को फ़ॉलो करें, ताकि वह अधिक विश्वसनीय लगे. 17 अगस्त तक, सामाजिक अनुसंधान केंद्र की उसी पहचान वाले एक लिंक्डइन खाते के 961 अनुयायी थे. उसने 200-500 कर्मचारी होने का दावा किया था, लेकिन सूची में सिर्फ़ दो कर्मचारी थे.
कभी-कभी रिपोर्टें अद्यतन करने के अलावा संचालकों ने हमारे मॉडल से अभियानों में उपयोग के लिए पाठ की रूपरेखा और सामग्री बनाने में भी मदद माँगी. मिसाल के तौर पर, यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनकी फ़र्ज़ी सामग्री में अलग-अलग देशों के अनुसार सही लहजा, शब्दावली और संस्थागत शैली हो. कुल काम में इसका हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा था. संभवतः इसलिए कि अभियान में लैटिन अमेरिका का कम-से-कम एक ऐसा व्यक्ति शामिल लगता था जिसकी मातृभाषा स्पेनी थी, इसलिए एआई की भाषाई मदद की ज़रूरत कम थी.
मिसाल के तौर पर, एक बार रूसी भाषी संचालक ने मॉडल से रूसी में ऐसा पत्र तैयार करने में मदद माँगी जो पनामा में यूक्रेन के मानद वाणिज्यदूत को भ्रष्टाचार में लिप्त दिखाए. फिर स्पेनी भाषी संचालक ने मॉडल से पत्र का स्पेनी में अनुवाद और उसके साथ इस्तेमाल होने वाले ऑडियो की पटकथा बनवाई. पत्र के पाठ से मेल खाती एक तस्वीर टिकटॉक पर पोस्ट की गई, जिसके पार्श्व-वाचन का पाठ भी संचालक की पटकथा से मेल खाता था. पोस्ट करने वाला खाता खुद को समाचार प्रकाशन बताता था, लेकिन उसमें पनामा के टीवीएन नोटिसियास(एक नई विंडो में खुलेगा) का लोगो था. टिकटॉक चैनल का केवल एक अनुयायी था और इस फ़र्ज़ी सामग्री को फैलाने के बाद उसने पोस्ट करना बंद कर दिया.

टिकटॉक पोस्ट में दिख रहा पत्र, जिसका पाठ इस अभियान ने बनाया था. पार्श्व-वाचन की पटकथा भी अभियान ने ही तैयार की थी.
एक अन्य अवसर पर, रूस में मौजूद स्पेनी भाषी संचालक ने मॉडल को रूसी में एक पटकथा दी जिसमें दावा था कि नोबोआ ने इक्वाडोर के गरीब लोगों का अपमान किया है. उसने इसका इक्वाडोर की स्पेनी में अनुवाद माँगा. तीसरे अवसर पर, मार्च में, उसी उपयोगकर्ता ने मॉडल से “इंटरनेशनल सिक्योरिटी सॉल्यूशंस एफ़ज़ेडई” नामक कंपनी और इक्वाडोर के एक व्यक्ति के बीच स्पेनी अनुबंध के मसौदे की शुद्धि-जाँच माँगी. उसमें कथित तौर पर यूक्रेन में बुनियादी ढाँचा सेवाएँ देने की बात थी. उपयोगकर्ता के सवाल भाषा और पृष्ठ-सज्जा सुधारने पर केंद्रित थे, जैसे किन शब्दों को मोटे अक्षरों में दिखाना चाहिए.
शब्दांकन तय होने के बाद अनुबंध से जुड़े उपयोगकर्ता के निर्देश समाप्त हो गए. लेकिन सार्वजनिक स्रोतों के शोध से पता चलता है कि बाद में “अनुबंध” की तस्वीर सोशल मीडिया पर फैलाई गई(एक नई विंडो में खुलेगा). इसका इस्तेमाल इस दावे को मज़बूत करने में हुआ कि नोबोआ सरकार ने एक मुखौटा कंपनी के साथ मिलकर इक्वाडोर के लोगों को धोखे से यूक्रेनी सेना में भर्ती करवाया था. फ़र्ज़ी सामग्री इतनी फैली कि अप्रैल की शुरुआत में उसकी तथ्य-जाँच(एक नई विंडो में खुलेगा) की गई. जाँचकर्ताओं ने निष्कर्ष दिया कि कंपनी “इक्वाडोर के कंपनी, प्रतिभूति और बीमा अधीक्षण प्राधिकरण के रजिस्टर में दर्ज नहीं है”.
इस अभियान के प्रभाव का आकलन खास सावधानी से करना ज़रूरी है. जैसा ऊपर बताया गया, संचालकों का एक मुख्य तरीका उन गतिविधियों का श्रेय लेना था जिनका उनके अभियान से कोई संबंध नहीं था. इसलिए उनकी आंतरिक रिपोर्टों में प्रभाव संबंधी अपने दावों को बिना जाँच के सच नहीं माना जा सकता. इसी तरह, जिन कुछ फ़र्ज़ी खबरों को फैलाने का उन्होंने दावा किया, वे सार्वजनिक स्रोतों के शोध में नहीं मिलीं. संभव है कि वे निजी माध्यमों से फैलाई गई हों, पहले ही हटा दी गई हों या वास्तव में पोस्ट ही न की गई हों.
फिर भी, सार्वजनिक स्रोतों के साक्ष्यों से हम उनके कुछ दावों की पुष्टि कर सके. अभियान ने जिन कुछ फ़र्ज़ी सामग्रियों को फैलाने का दावा किया था, उन पर बाद में तथ्य-जाँचकर्ताओं ने रिपोर्ट की और सरकारों ने उन्हें झूठा बताया. इससे संकेत मिलता है कि वे इतनी व्यापक रूप से फैली थीं कि प्रतिक्रिया देना ज़रूरी हो गया. अन्य मामलों में हमें ऑनलाइन ऐसी सामग्री मिली जो इस अभियान द्वारा तैयार सामग्री से काफ़ी मेल खाती थी. सबसे उल्लेखनीय था अभियान का यह दावा कि उसने पेरू के एक स्कूल को धोखे में रखकर बांदेरा को दर्शाने वाला कार्यक्रम करवाया. बाद में लैटिन अमेरिका और यूरोप, दोनों में इस पर खबरें आईं और लगता है कि यूरोपीय संसद के कम-से-कम एक पोलिश सदस्य ने इस पर टिप्पणी भी की.
प्रभाव अभियानों को 1 (सबसे कम) से 6 (सबसे अधिक) तक आँकने वाले प्रसार पैमाने(एक नई विंडो में खुलेगा) पर हम इस अभियान को श्रेणी 5 में रखेंगे. साक्ष्य बताते हैं कि इसकी वजह से कई देशों के राजनेताओं ने सार्वजनिक टिप्पणियाँ कीं. अपनी रिपोर्टिंग शुरू करने के बाद यह पहला श्रेणी 5 अभियान है जिसे हमने बाधित किया है.
ईरान से चल रहा अभियान, जो भ्रामक लेखक नामों से ऑनलाइन समाचार प्रकाशनों में लंबे लेख छपवा रहा था.
हमने ईरान से चलाए जा रहे ChatGPT खातों के एक समूह पर प्रतिबंध लगाया. वे फ़ारसी में निर्देश देते थे और फ़ारसी तथा अंग्रेज़ी में सामग्री बनवाते थे. उन्होंने ChatGPT का उपयोग करने के लिए वीपीएन अपनाकर अपना स्थान छिपाया.
अभियान ने लंबे लेख और संपादकों को भेजे जाने वाले प्रकाशन प्रस्ताव सुधारने, सोशल मीडिया टिप्पणियाँ बनाने और आंतरिक रिपोर्टें सँवारने के लिए हमारे मॉडलों का उपयोग किया. संचालकों ने लेख छपवाने के प्रस्ताव सात अलग-अलग लेखक नामों से भेजे, इसलिए हमने उनके अभियान को “बोगस बाइलाइन्स” यानी फ़र्ज़ी लेखक नाम कहा है. लंबे लेख अमेरिका-ईरान संघर्ष पर केंद्रित थे. अधिकांश टिप्पणियाँ भी संघर्ष पर थीं; कुछ अमेरिकी राजनीति पर थीं, आम तौर पर संघर्ष के व्यापक संदर्भ में.
उनके मुख्य कार्यक्षेत्रों का दिखने वाला प्रभाव काफ़ी अलग-अलग था. हमें दुनिया भर के लगभग एक दर्जन ऑनलाइन प्रकाशनों में अभियान से जुड़े लेखक नामों के तहत प्रकाशित या पुनर्प्रकाशित करीब 100 लेख मिले. ये छोटे और मध्यम आकार के प्रकाशन थे, जिनका ध्यान आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय मामलों, भू-राजनीति और मध्य पूर्व की घटनाओं पर था. इसके उलट, सोशल मीडिया की किसी भी टिप्पणी पर पसंद, साझा करने या आगे के जवाबों के रूप में उल्लेखनीय प्रतिक्रिया नहीं दिखी. दरअसल, संचालकों की आंतरिक रिपोर्टों में सोशल मीडिया प्रभाव मापने के लिए भ्रामक गणना की गई थी, संभवतः उनकी प्रभावशीलता बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए.
कुल गतिविधियाँ किसी व्यावसायिक पक्ष द्वारा पैसे लेकर प्रभाव अभियान चलाने जैसी लगती थीं, लेकिन हम उस पक्ष की पहचान नहीं कर सके. हमने इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों के साथ साझा की है.
इस अभियान की सबसे दूर तक पहुँचने वाली गतिविधि में ChatGPT से अमेरिका-ईरान संघर्ष की भू-राजनीति पर अंग्रेज़ी के लंबे लेखों की समीक्षा और सुधार करवाना शामिल था. आम निर्देशों में मॉडल से किसी विशेष ऑनलाइन प्रकाशन के लेख स्वीकृति मानदंडों के आधार पर अंग्रेज़ी मसौदे का आकलन करने और उसे अनुरूप बनाने के लिए संपादन सुझाने को कहा जाता था. संपादन मंज़ूर करने के बाद संचालक मॉडल से ऐसा ईमेल बनवाते थे जिससे वे संबंधित ऑनलाइन प्रकाशन के संपादक को लेख प्रकाशित करने का प्रस्ताव भेज सकें.
ये प्रस्ताव सात फ़र्ज़ी लेखक नामों से तैयार किए गए: एर्विन बी. हॉस्किन्स, नोआ लैमिंगटन, सोफ़िया गोंज़ालेज़, माइकल हैरिसन, एरिका फ़्यूज़ियर, जेनी विलियम्स और ऐलिस जॉनसन. कुछ लेखों के साथ ऑनलाइन प्रकाशित परिचयों के अनुसार, हर फ़र्ज़ी पहचान खुद को पश्चिमी पत्रकार बताती थी—अधिकतर अमेरिकी, हालाँकि नोआ लैमिंगटन के परिचय में न्यूज़ीलैंड में होने का दावा था. उनका ध्यान अक्सर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, मध्य पूर्व, मानवाधिकार या संघर्ष पर बताया गया था. एक फ़र्ज़ी पहचान, “माइकल हैरिसन”, के लिए संचालकों ने मॉडल से परिचय भी लिखवाया. (गौरतलब है कि मार्च में मेटा ने एक ईरानी प्रभाव अभियान को बाधित किया था(एक नई विंडो में खुलेगा), जिसमें भी “माइकल हैरिसन” नाम की फ़र्ज़ी पत्रकार पहचान थी.)
इनमें से कुछ फ़र्ज़ी पहचानों को विश्वसनीय दिखाने के लिए कई सोशल मीडिया मंचों पर खाते भी बनाए गए थे. मिसाल के तौर पर, माइकल हैरिसन की फ़र्ज़ी पहचान के समर्थन में मीडियम, एक्स और फ़ेसबुक पर खाते थे. एर्विन बी. हॉस्किन्स की फ़र्ज़ी पहचान के एक्स, फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर खाते थे. इस पहचान के परिचय में “एक अमेरिकी स्वतंत्र लेखक” होने का दावा था, लेकिन सोशल मीडिया की पारदर्शिता सेटिंग में खातों का स्थान ईरान दिखता था.

ऊपर, एर्विन हॉस्किन्स की फ़र्ज़ी पहचान का इंस्टाग्राम परिचय. नीचे बाईं ओर, एक्स खाते की पारदर्शिता जानकारी, जिसमें पश्चिम एशिया के एंड्रॉइड ऐप का उपयोग दिखता है. नीचे दाईं ओर, इंस्टाग्राम खाते की पारदर्शिता जानकारी, जिसमें स्थान ईरान है. मेटा ने अगस्त में इंस्टाग्राम खाते पर प्रतिबंध लगा दिया.
सार्वजनिक स्रोतों की जाँच तकनीकों से हमें एक दर्जन से अधिक प्रकाशनों में करीब 100 लेख मिले, जो संचालकों के किसी न किसी लेखक नाम से प्रकाशित हुए थे. ये प्रकाशन आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय मामलों, भू-राजनीति और मध्य पूर्व की घटनाओं पर केंद्रित थे, कभी-कभी युद्ध-विरोधी या प्रगतिशील दृष्टिकोण से. हमें मिला सबसे पुराना लेख जुलाई 2025 में और सबसे नया अक्टूबर 2026 में प्रकाशित हुआ था. अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद लेखों के प्रकाशन की आवृत्ति बहुत बढ़ गई.

लेखक और विषय के अनुसार लेखों की समयरेखा, जुलाई 2025—सितंबर 2026. मार्च 2026 से अमेरिका-ईरान संबंधों पर प्रकाशनों की बढ़ी संख्या पर ध्यान दें.

फ़रवरी से जुलाई 2026 के बीच विभिन्न ऑनलाइन प्रकाशनों में इस अभियान से जुड़े लेखक नामों से छपे लेखों के कुछ शीर्षक.
इनमें से कम-से-कम कुछ लेखों का प्रचार संबंधित प्रकाशनों के सोशल मीडिया खातों ने किया. इससे ईरानी संचालकों को उन लोगों तक पहुँचने का संभावित रास्ता मिला, जिन तक वे अन्यथा नहीं पहुँच पाते.
लेखों के साथ-साथ दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों में शामिल लोगों ने ChatGPT से भू-राजनीतिक या राजनीतिक विषयों पर अंग्रेज़ी या फ़ारसी में एक साथ कई टिप्पणियाँ बनवाईं. वे आम तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट का पाठ या स्क्रीनशॉट देकर मॉडल से अपने समग्र रुख के अनुरूप कई जवाब माँगते थे. फिर इन्हें ऑनलाइन पोस्ट किया जाता था, अक्सर एक-दूसरे से कुछ ही मिनटों के अंतर पर. संचालकों की आंतरिक रिपोर्टों में लोगों द्वारा और स्वचालित, दोनों तरह से पोस्ट करने का ज़िक्र था. हमारे पास ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि इस स्वचालन में हमारे मॉडलों की मदद ली गई थी.

इस अभियान द्वारा बनाए गए और जुलाई में पोस्ट किए गए ट्वीट: बाईं ओर अंग्रेज़ी में, दाईं ओर फ़ारसी में. अंग्रेज़ी टिप्पणियाँ उस अंग्रेज़ी ट्वीट के जवाब में थीं जिसमें चेतावनी थी कि अमेरिका ईरान पर “बड़े पैमाने के हमले” की तैयारी कर रहा है. इस चित्र की सभी टिप्पणियाँ 10 मिनट के भीतर पोस्ट की गईं. फ़ारसी टिप्पणियाँ ईरान पर अमेरिकी हमलों से जुड़े फ़ारसी ट्वीट के जवाब में थीं और 13 मिनट के भीतर पोस्ट की गईं.
एक साथ कई टिप्पणियाँ बनाने की कुछ गतिविधियों में अभियान के अपने समाचार लेखों से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्टों के जवाब बनाए गए. इसके लिए संचालक अपने लेखों का प्रचार करने वाली पोस्टों के स्क्रीनशॉट देते और उनकी तारीफ़ या समर्थन करने वाली टिप्पणियाँ बनवाते थे, संभवतः लेखों को अधिक लोकप्रिय दिखाने के लिए.

अमेरिका के एक स्थानीय समाचार पेज की फ़ेसबुक पोस्ट, जिसमें अभियान द्वारा बनाया गया लेख साझा किया गया है, और उसी अभियान द्वारा बनाई गई पोस्ट की टिप्पणियाँ.
अधिकांश टिप्पणी-समूह व्यापक रूप से ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच संघर्ष पर केंद्रित थे. उपयोगकर्ताओं ने मिसाइल हमलों, युद्धविराम और कूटनीतिक चालों जैसे विषयों पर टिप्पणियाँ माँगीं. निर्देश थे कि अमेरिका को आक्रांता, इज़राइल को अमेरिका का अविश्वसनीय सहयोगी और ईरान को ऐसा पीड़ित दिखाया जाए जो दबाव में न झुके और डटा रहे. संचालकों ने ब्रिटेन स्थित उपग्रह प्रसारण नेटवर्क ईरान इंटरनेशनल की पोस्टों के लिए खास तौर पर बड़ी संख्या में जवाब बनाए. ईरानी शासन के इस आलोचक के विरुद्ध उन्होंने फ़ारसी में तीखे जवाबों के दो दर्जन से अधिक समूह तैयार किए. कुछ समूहों में अमेरिकी राजनीतिक मुद्दों की सोशल मीडिया पोस्टों के जवाब बनाए गए, आम तौर पर संघर्ष के व्यापक संदर्भ में ही.

अमेरिकी राजनीति की पोस्टों के जवाब में इस अभियान द्वारा बनाई गई इंस्टाग्राम टिप्पणियाँ.
हमें इनमें से कुछ ही जवाब ऑनलाइन पोस्ट किए मिले. कई अन्य हमारी सार्वजनिक स्रोतों की खोज में नहीं मिले, संभवतः इसलिए कि उन्हें पोस्ट ही नहीं किया गया था या उन खातों से किया गया था जो पहले ही हटा दिए गए थे. (मिसाल के तौर पर, तीन फ़र्ज़ी पत्रकारों—एरिका फ़्यूज़ियर, ऐलिस जॉनसन और जेनी विलियम्स—ने अपने प्रकाशित परिचयों में एक्स खातों के हैंडल दिए थे: अगस्त 2026 तक सभी निलंबित हो चुके थे.) ऑनलाइन टिप्पणियाँ करने वाले कुछ खातों के नाम पश्चिमी लगते थे, लेकिन उनका स्थान ईरान दिखता था.

ऊपर दिखाई गई टिप्पणियाँ करने वाले इंस्टाग्राम खातों की पारदर्शिता सेटिंग, जिनमें उनका स्थान ईरान दिखता है.
जहाँ हमें ये जवाब पोस्ट किए मिले, वहाँ वे आम तौर पर उस पोस्ट की कुल टिप्पणियों का छोटा हिस्सा थे. इससे संकेत मिलता है कि वास्तविक प्रतिक्रियाओं के बीच संचालकों की आवाज़ हावी नहीं थी. इन पर उल्लेखनीय प्रतिक्रिया भी नहीं दिखी. दरअसल, अभियान के जवाबों को पसंद करने वाले कई खाते खुद उसी अभियान से जुड़े थे. हमने इस मामले की जानकारी उद्योग के साझेदारों से साझा की है, जो उपयोगकर्ता सहभागिता का समग्र आकलन करने की सबसे बेहतर स्थिति में हैं.
अपनी गतिविधियों को अधिक लोकप्रिय दिखाने की कोशिश सार्वजनिक पोस्टों तक सीमित नहीं थी. सामग्री बनवाने के साथ-साथ संचालक कभी-कभी ChatGPT से ऐसी रिपोर्टें सुधारने को कहते थे जो उनके सोशल मीडिया अभियान की आंतरिक रिपोर्टें लगती थीं. इसके लिए वे आम तौर पर मॉडल को आँकड़ों की एक शृंखला देकर उसे सँवरी हुई प्रस्तुतियों में बदलने को कहते थे.
यह हमारे द्वारा बाधित पहला अभियान नहीं है जिसने अपनी(एक नई विंडो में खुलेगा) स्व-समीक्षा(एक नई विंडो में खुलेगा) लिखने के लिए एआई का उपयोग किया. ईरानी संचालकों के खुद अपना काम आँकने के प्रयासों में सबसे उल्लेखनीय बात उनका अपनाया तरीका था. उनके “प्रभाव” का मुख्य माप उन पोस्टों को देखे जाने की संख्या थी जिन पर उन्होंने जवाब दिए थे (खुद जवाबों को देखे जाने की संख्या नहीं). यह गिनती जवाब पोस्ट होने से पहले और उसके बाद किसी अनिर्दिष्ट समय पर की गई थी. इस गणना में उन दृश्यों को अलग नहीं किया गया जो मूल पोस्ट की लोकप्रियता या अन्य टिप्पणियों जैसे कारणों से आए होंगे. इसलिए इसने अभियान के प्रभाव के आँकड़ों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया. इससे लगता है कि संचालकों को या तो गणना का बेहतर तरीका पता नहीं था या उन्होंने उसे अपनाना नहीं चुना.
दरअसल, सार्वजनिक स्रोतों के अवलोकन से मिले साक्ष्यों के आधार पर अभियान के दो मुख्य कार्यक्षेत्रों का संभावित प्रभाव बहुत अलग-अलग स्तर का लगता है.
हमें मिले सोशल मीडिया जवाबों पर पसंद, दृश्य और टिप्पणियों की संख्या आम तौर पर कम थी (एक या दो अंकों में). जैसा ऊपर बताया गया, जवाब आम तौर पर संबंधित पोस्ट की कुल टिप्पणियों का छोटा हिस्सा थे. प्रभाव अभियानों को 1 (सबसे कम) से 6 (सबसे अधिक) तक आँकने वाले प्रसार पैमाने(एक नई विंडो में खुलेगा) पर हम अभियान के इस हिस्से को श्रेणी 2 में रखेंगे. कई मंचों पर टिप्पणियाँ थीं, लेकिन व्यापक प्रसार या जवाबों पर हावी होने की क्षमता के संकेत कम थे.
इसके उलट, फ़र्ज़ी पत्रकार कई प्रकाशनों में अपने लेख छपवाने में सफल रहे, जिनमें कुछ के अनुयायी बड़ी संख्या में थे. मिसाल के तौर पर, अभियान के लेख छापने वाले एक ऑनलाइन प्रकाशन के अगस्त 2026 तक फ़ेसबुक पर करीब 20 लाख, एक्स पर करीब 3,55,000 और इंस्टाग्राम पर 5,44,000 से अधिक अनुयायी थे. कई मीडिया प्रकाशनों तक लगातार पहुँचने के आधार पर हम अभियान के इस हिस्से को श्रेणी 4 में रखेंगे.


