GPT‑Rosalind को एकेडमिक रिसर्च लैब्स तक पहुँचाना
पेश है रोज़लिंड एकेडमिक प्लान, जिसके तहत योग्य लैब्स को GPT‑रोज़लिंग और लाइफ़ साइंसेज़ में नई खोजों के लिए ज़रूरी टूल्स का स्पॉन्सर्ड एक्सेस मिलेगा.
हम रोज़लिंड एकेडमिक प्लान लॉन्च कर रहे हैं, ताकि ज़्यादा एकेडमिक रिसर्चर्स GPT‑Rosalind का इस्तेमाल कर सकें. यह लाइफ़ साइंसेज़ के लिए हमारा खास मॉडल है, जो फ़्रंटियर रीज़निंग को रोज़लिंड वर्कबेंच(एक नई विंडो में खुलेगा) के साथ जोड़ता है. इसकी मदद से मेडिसिनल केमिस्ट्री, जीनोमिक्स, वेट-लैब में मदद और दूसरे साइंटिफ़िक कामों के लिए अलग-अलग स्पेशलाइज़्ड टूल्स को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. योग्य लैब्स को 12 महीनों तक बिना किसी खर्च के 30 Business Standard सीट्स मिल सकती हैं. GPT‑Rosalind का एक्सेस ट्रस्टेड एक्सेस के लिए अप्रूवल मिलने पर दिया जाएगा.
एकेडमिक रिसर्च से ऐसी नई जानकारी मिलती है, जिस पर पूरी फ़ील्ड में आगे की रिसर्च की जाती है. बायोलॉजी से जुड़े किसी सामान्य सवाल से शुरू हुई रिसर्च आगे चलकर बीमारियों की पहचान करने, दवाइयाँ बनाने या फ़सलें उगाने के तरीके बदल सकती है. लेकिन ऐसी तरक्की के लिए साइंटिस्ट्स के पास नए आइडियाज़ एक्सप्लोर करने, उन्हें टेस्ट करने और अपनी सीख शेयर करने के लिए ज़रूरी रिसोर्सेज़ होने चाहिए.
नई साइंटिफ़िक खोजों की रफ़्तार बढ़ाना OpenAI के उस मिशन का अहम हिस्सा है, जिसका मकसद यह पक्का करना है कि आर्टिफ़िशियल जेनरल इंटेलिजेंस से पूरी दुनिया के लोगों को फ़ायदा हो. इस प्लान के ज़रिए हम ऐसी अहम रिसर्च करने वाले साइंटिस्ट्स को सपोर्ट कर रहे हैं—हम चाहते हैं कि ज़्यादा लैब्स अपनी एक्सपर्टीज़ और समझ के साथ लाइफ़ साइंसेज़ रिसर्च के लिए बनाए गए AI टूल्स का इस्तेमाल कर सकें.
आज जिन कई बड़ी खोजों और टेक्नोलॉजी का हम इस्तेमाल करते हैं, उनके पीछे सालों की शुरुआती रिसर्च है.
ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट ने मॉडर्न जीनोमिक्स को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई. इससे मेडिसिन, बीमारियों की पहचान और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़े बदलाव आए.
बैक्टीरिया के इम्यून सिस्टम को समझने के लिए की गई रिसर्च से CRISPR-Cas9 की खोज हुई. इसने जीनोम एडिटिंग का तरीका बदल दिया और अब कैंसर, जेनेटिक बीमारियों, खेती और बायोटेक्नोलॉजी की रिसर्च को आगे बढ़ा रहा है. इसी तरह, यूनिवर्सिटीज़ में दशकों तक mRNA पर हुई रिसर्च ने COVID-19 वैक्सीन्स और नई तरह की वैक्सीन्स व इलाज विकसित करने की नींव रखी.
एकेडमिक रिसर्च ने हमेशा मेडिसिन और बायोटेक्नोलॉजी में नई खोजों का रास्ता बनाया है. GPT‑Rosalind की एडवांस और स्पेशलाइज़्ड रीज़निंग को ज़्यादा साइंटिस्ट्स की एक्सपर्टीज़ और समझ के साथ जोड़कर हम ऐसी खोजों को सपोर्ट करना चाहते हैं, जिनका फ़ायदा लैब से बाहर भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचे.
OpenAI एकेडमिक रिसर्चर्स को उनके साइंटिफ़िक लक्ष्यों तक पहुँचने में मदद करने के लिए काम कर रहा है. कई जानी-मानी एकेडमिक लैब्स पहले से ही एक्सप्लोर कर रही हैं कि GPT‑Rosalind प्रोटीन डिज़ाइन से लेकर नर्व सेल्स के धीरे-धीरे खराब होने के प्रोसेस को समझने तक कैसे मदद कर सकता है. ये उदाहरण दिखाते हैं कि रिसर्चर्स अपने साइंटिफ़िक वर्कफ़्लोज़ में मॉडल का इस्तेमाल किन कामों के लिए कर रहे हैं.
नए रोज़लिंड एकेडमिक प्लान के साथ एकेडमिक रिसर्चर्स अपनी लैब में GPT‑Rosalind और रोज़लिंड वर्कबेंच का ज़्यादा फ़्लेक्सिबल तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे वे अपनी साइंटिफ़िक रिसर्च में फ़्रंटियर AI मॉडल्स की इंटेलिजेंस का फ़ायदा उठा सकते हैं.
योग्य लैब्स को मिलेंगे:
12 महीनों तक हर यूज़र के लिए $0 प्रति महीना पर अधिकतम 30 Business Standard सीट्स.
प्लान की इस्तेमाल की लिमिट्स के तहत OpenAI के सभी कमर्शियल तौर पर उपलब्ध फ़्रंटियर मॉडल्स का एक्सेस.
ट्रस्टेड एक्सेस के लिए अप्रूवल मिलने के बाद GPT‑Rosalind का एक्सेस.
रोज़लिंड एकेडमिक प्लान के ज़रिए शेयर किए गए रिसर्च डेटा का इस्तेमाल डिफ़ॉल्ट रूप से हमारे मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए नहीं किया जाता है.
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एक्सेस ऐक्टिव होने के बाद GPT‑Rosalind इस्तेमाल करें
GPT‑Rosalind लाइफ़ साइंसेज़ के लिए बनाया गया एक स्पेशलाइज़्ड मॉडल है, जो बायोलॉजी के मुश्किल सवालों पर गहराई से सोचने और समझने में मदद करता है. ट्रस्टेड एक्सेस के लिए अप्रूव किए गए रिसर्चर्स इसका इस्तेमाल सेंसिटिव साइंटिफ़िक सवालों की जाँच के लिए कर सकते हैं. इस दौरान सही रिसर्च के लिए बनाए गए सेफ़्टी नियम लागू रहते हैं.
रिसर्च के मुख्य क्षेत्र हैं:
दवाओं और प्रोटीन का डिज़ाइन
संभावित नई दवाओं, इलाज में इस्तेमाल होने वाले प्रोटीन्स, पेप्टाइड्स और एंज़ाइम्स को डिज़ाइन करना. साथ ही, उनके मॉलेक्यूलर इंटरैक्शन, सही टारगेट पर असर करने की क्षमता, स्टेबिलिटी और आगे डेवलप करने की क्षमता को बेहतर बनाना.
कार्ड 1 / 7: दवाओं और प्रोटीन का डिज़ाइन
रोज़लिंड एकेडमिक प्लान फ़िलहाल अमेरिका की यूनिवर्सिटीज़ की एकेडमिक लैब्स के लिए उपलब्ध है. जिन यूनिवर्सिटीज़ के पास OpenAI Enterprise एग्रीमेंट नहीं है, उनके प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर्स और लैब लीड्स हमारी ट्रस्टेड एक्सेस प्रोसेस के ज़रिए अपनी लैब की ओर से अप्लाई कर सकते हैं. जिन यूनिवर्सिटीज़ के पास पहले से एग्रीमेंट है, उनकी लैब्स को अपनी यूनिवर्सिटी की Enterprise एक्सेस प्रोसेस के ज़रिए अप्लाई करना होगा.
अप्रूवल मिलने के बाद प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर्स और लैब लीड्स अपनी लैब के अधिकतम 30 चुने हुए सदस्यों के लिए GPT‑Rosalind का फ़्री एक्सेस ऐक्टिव कर सकते हैं. इसके साथ प्लान में शामिल OpenAI के दूसरे फ़्रंटियर मॉडल्स का एक्सेस भी मिलेगा. फ़िलहाल API एक्सेस इसमें शामिल नहीं है. वेरिफ़ाई किए गए प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर्स और लैब लीड्स सदस्यों के एक्सेस और परमिशन्स को मैनेज करेंगे. साथ ही, यह देखना भी उनकी ज़िम्मेदारी होगी कि लैब में इन टूल्स का इस्तेमाल अप्रूवल के मुताबिक हो.
अपनी लैब या ऑर्गेनाइज़ेशन के लिए अप्लाई करने का तरीका चुनें.
एकेडमिक लैब्स
रोज़लिंड एकेडमिक प्लान
उन योग्य ऑर्गेनाइज़ेशन्स के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर्स और लैब लीड्स के लिए, जिनके पास पहले से Enterprise अकाउंट नहीं है.
अपनी लैब की ओर से अप्लाई करें.
मौजूदा Enterprise अकाउंट्स
GPT-Rosalind का एक्सेस
उन योग्य संस्थाओं के एकेडमिक यूज़र्स के लिए, जिनके पास पहले से OpenAI Enterprise एग्रीमेंट है.
अपने मौजूदा Enterprise अकाउंट से एक्सेस के लिए रिक्वेस्ट करें.
GPT‑Rosalind का एक्सेस अप्रूवल मिलने के बाद ही दिया जाएगा.
कौन अप्लाई कर सकता है, अप्लाई करने के लिए क्या ज़रूरी है और शुरुआत कैसे करें, यह सब जानने के लिए हमारी हेल्प सेंटर गाइड(एक नई विंडो में खुलेगा) देखें.
एक्सेस ऐक्टिव करने से पहले हम:
यह वेरिफ़ाई करते हैं कि संस्था सही है और प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर या लैब लीड की पहचान सही है
लैब लीड के प्रोफ़ेशनल बैकग्राउंड, संस्था में उनके पद और लैब के एक्सेस की देखरेख करने के उनके अधिकार की जाँच करते हैं
जाँच करते हैं कि लैब किस संस्था से जुड़ी है, वहाँ किस तरह की रिसर्च होती है और GPT‑Rosalind का इस्तेमाल किन कामों के लिए किया जाएगा
लैब लीड और संस्था की ओर से तय किए गए सेफ़्टी कॉन्टैक्ट की ज़िम्मेदारियाँ साफ़ तौर पर तय करते हैं
एक्सेस ऐक्टिव होने के बाद भी हम इस्तेमाल पर नज़र रखते हैं और सेफ़्टी नियम लागू करते हैं. रजिस्टर्ड हाई-सेंसिटिविटी यूज़ केसेज़ में हमारी सेफ़्टी जाँच अप्रूव की गई रिसर्च के कॉन्टेक्स्ट को भी ध्यान में रखती है. कोई सवाल उठने पर हम रिसर्चर्स से संपर्क करके उनके काम के बारे में और जानकारी ले सकते हैं और यह चेक कर सकते हैं कि उन्हें उस काम के लिए मंज़ूरी मिली है या नहीं. इस तरीके का मकसद AI के संभावित गलत इस्तेमाल का पता लगाना है. साथ ही, सही रिसर्च के कॉन्टेक्स्ट को समझना और मंज़ूरी वाले कामों में गैरज़रूरी रुकावटें कम करना भी ज़रूरी है.
मुश्किल साइंटिफ़िक सवालों के लिए स्पेशलाइज़्ड इंटेलिजेंस
हम ज़्यादा साइंटिस्ट्स तक काम के AI टूल्स पहुँचाने की अपनी बड़ी कोशिश की शुरुआत एकेडमिक लैब्स से कर रहे हैं. एक्सेस का खर्च कम करके हम चाहते हैं कि ज़्यादा रिसर्चर्स नए आइडियाज़ पर काम कर सकें. इनसे होने वाली खोजों का फ़ायदा उनकी लैब्स से कहीं आगे तक पहुँच सकता है. जैसे, बीमारियों को बेहतर समझना, नए और बेहतर इलाज विकसित करना और ऐसे फ़ूड सिस्टम्स बनाना जो मुश्किल हालात का बेहतर सामना कर सकें.
ऐसी तरक्की तभी होगी, जब साइंटिस्ट्स अहम सवाल पूछेंगे और उनके जवाब ढूँढने के लिए रिसर्च करेंगे. हम ज़्यादा से ज़्यादा साइंटिस्ट्स की इस काम में मदद करना चाहते हैं.
अगर आप किसी एकेडमिक लैब से जुड़े हैं, तो रोज़लिंड एकेडमिक प्लान के बारे में और जानें और देखें कि आप इसके लिए आप अप्लाई कर सकते हैं या नहीं(एक नई विंडो में खुलेगा).



