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27 अगस्त 2026

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बेहतर जवाब, बेहतर सोच: ChatGPT और क्रिटिकल थिंकिंग ट्रेनिंग से छात्रों को क्या मिला

1,000 से ज़्यादा छात्रों पर किए गए एक रैंडमाइज़्ड एक्सपेरिमेंट में यह देखा गया कि ChatGPT का एक्सेस और वजहों व नतीजों को समझने की ट्रेनिंग छात्रों के काम को कैसे बेहतर बनाती हैं.

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जब छात्र असली दुनिया से जुड़े किसी असाइनमेंट में ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं तो क्या होता है? क्या काम की क्वालिटी बेहतर होने से नयापन कम हो जाती है?

Bocconi University के रिसर्चर्स ने OpenAI इकोनॉमिक रिसर्च के साथ मिलकर एक नया एक्सपेरिमेंट किया. इसमें ChatGPT के एक्सेस और क्रिटिकल थिंकिंग ट्रेनिंग के अलग-अलग, लेकिन एक-दूसरे को पूरा करने वाले असर सामने आए. ChatGPT के एक्सेस से छात्रों के काम की क्वालिटी और लॉजिक बेहतर हुआ, जबकि वजहों और नतीजों को समझने की एक एक्सरसाइज़—जो क्रिटिकल थिंकिंग का एक तरीका है—छात्रों को ज़्यादा नए और अलग आइडियाज़ देने में मदद करती है. जिन छात्रों को ChatGPT का एक्सेस और यह ट्रेनिंग दोनों मिलीं, उनके काम में दोनों तरह के सुधार दिखे.

नतीजों से यह भी पता चलता है कि छात्रों की प्रोग्रेस को समझने के लिए सिर्फ़ एक चीज़ पर ध्यान देना काफ़ी नहीं है. AI की मदद से छात्रों के लिए अच्छे और सलीके से तैयार जवाब देना आसान हो रहा है. इसलिए असाइनमेंट्स में नयापन जैसी दूसरी ज़रूरी खूबियों को भी परखने के तरीके शामिल करने पड़ सकते हैं. 

AI ने छात्रों के अनुभव की कमी को कम करने में मदद की

इस एक्सपेरिमेंट के दौरान Bocconi University के 1,000 से ज़्यादा पहले साल के अंडरग्रेजुएट छात्रों ने असली बिज़नेस केस पर काम किया. उन्हें यूनिवर्सिटी की मर्चेंडाइज़ शॉप के लिए मार्केटिंग रिकमेंडेशंस तैयार करनी थीं.

छात्रों को क्लास के समय के हिसाब से रैंडम तरीके से चार ग्रुप में बाँटा गया. एक ग्रुप को ChatGPT (GPT‑4o) का एक्सेस मिला, दूसरे को वजहों और नतीजों को समझने की ट्रेनिंग मिली, तीसरे को दोनों मिले और चौथे को इनमें से कुछ भी नहीं मिला. वजहों और नतीजों को समझना क्रिटिकल थिंकिंग का एक खास तरीका है. इसमें यह समझना शामिल है कि किसी चीज़ की वजह से क्या असर होता है और कोई सॉल्युशन किस वजह से काम करेगा या नहीं करेगा. छात्रों को दी गई यह ट्रेनिंग AI से जुड़ी नहीं थी. इसमें एक गेम, उदाहरण, सवालों और फ़ीडबैक के ज़रिए वजहों और नतीजों को समझना सिखाया गया. 

छात्रों की सबमिशंस को ट्रेनिंग पाए इंसानी ग्रेडर्स ने पाँच-पॉइंट रूब्रिक से जाँचा. इसके अलावा, रिसर्चर्स ने ऑटोमेटेड टेक्स्ट एनालिसिस की मदद से हर सबमिशन में आइडियाज़ की संख्या और अलग-अलग तरह के आइडियाज़, वजहों-नतीजों वाली सोच के संकेत और तीन एक्सपर्ट्स की सबमिशंस से उसकी समानता को भी मापा. 

"ChatGPT के एक्सेस और क्रिटिकल थिंकिंग की ट्रेनिंग से छात्रों को अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे को पूरा करने वाले फ़ायदे मिले" टाइटल वाला डायग्राम. इसमें ChatGPT के एक्सेस और वजहों व नतीजों को समझने की ट्रेनिंग वाले चार ग्रुप्स की तुलना की गई है. जिस ग्रुप में दोनों चीज़ें थी, वहाँ रीज़निंग के स्किल्स में ज़्यादा सुधार दिखा दिया.

जिन छात्रों को ChatGPT का एक्सेस मिला, उन्होंने पाँच-पॉइंट स्केल पर लगभग एक पॉइंट ज़्यादा स्कोर किया. उनके जवाबों में ज़्यादा आइडियाज़ थे, उनकी सोच ज़्यादा साफ़ थी और वे एक्सपर्ट्स की लिखी रिकमेंडेशंस से ज़्यादा मिलते थे. यानी AI ने नए छात्रों को ऐसा काम तैयार करने में मदद की, जो ज़्यादा प्रोफ़ेशनल लगा. खास बात यह है कि छात्रों ने अपना असाइनमेंट सीधे ChatGPT को नहीं सौंप दिया था. उन्हें खुद तय करना था कि क्या पूछना है, मिले जवाबों को परखना है और अपनी फ़ाइनल सबमिशन में क्या रखना है. 

क्रिटिकल थिंकिंग की ट्रेनिंग ने एक अलग तरह से मदद की

क्रिटिकल थिंकिंग की एक्सरसाइज़ से एक ऐसा नतीजा सामने आया, जिसकी उम्मीद कम थी. जिन छात्रों ने यह एक्सरसाइज़ पूरी की, उन्होंने ज़्यादा साफ़ तरीके से बताया कि उनके आइडियाज़ क्यों काम कर सकते हैं और कब काम नहीं करेंगे. लेकिन उनके ग्रेडिंग स्कोर ज़्यादा नहीं थे. इस स्कोर में सिर्फ़ यह देखा गया था कि उनकी रिकमेंडेशंस यूनिवर्सिटी स्टोर के दो तय मार्केटिंग लक्ष्यों—लोगों में स्टोर की जानकारी और उसका इस्तेमाल बढ़ाना—को कितनी अच्छी तरह पूरा करती हैं.

टेक्स्ट एनालिसिस से एक और फ़ायदा सामने आया, जिसे ग्रेडिंग स्कोर में नहीं देखा गया था. इस ग्रुप के छात्रों ने अलग-अलग तरह के ज़्यादा आइडियाज़ दिए और उनके आइडियाज़ दूसरे छात्रों के आइडियाज़ से भी ज़्यादा अलग थे. यह इसलिए अहम है क्योंकि इस एक्सपेरिमेंट में इस्तेमाल किए गए पारंपरिक ग्रेडिंग तरीके से साफ़ और अच्छे तरीके से लिखा जवाब तो बेहतर स्कोर पा सकता है, लेकिन यह पता नहीं चलता कि छात्र ने ऐसा आइडिया दिया या नहीं जो किसी और ने नहीं दिया.

AI का एक्सेस सोचने की स्किल्स के साथ मिलकर काम कर सकता है

एजुकेशन में AI को लेकर बहस को कभी-कभी इस तरह देखा जाता है कि छात्रों को खुद सोचना सीखना चाहिए या AI का इस्तेमाल करना.

यह एक्सपेरिमेंट दिखाता है कि दोनों की अपनी अलग अहमियत है. AI के एक्सेस से छात्रों ने ज़्यादा अच्छे तरीके से तैयार, ज़्यादा आइडियाज़ वाले और बेहतर लॉजिक वाले जवाब दिए. क्रिटिकल थिंकिंग की ट्रेनिंग ने उन्हें अलग-अलग और नए आइडियाज़ सोचने, अपने अनुमानों पर सवाल उठाने और यह समझाने में मदद की कि उनके आइडियाज़ क्यों काम करने चाहिए.

दोनों साथ मिलकर बेहतर काम करते हैं. 

जिन छात्रों को ChatGPT का एक्सेस और क्रिटिकल थिंकिंग की एक्सरसाइज़ दोनों मिलीं, उनमें दोनों के फ़ायदे दिखे. उनके आइडियाज़ की अलग-अलग तरह की रेंज सिर्फ़ एक्सरसाइज़ करने वाले छात्रों जितनी ही थी. उनके ग्रेडिंग स्कोर और आइडियाज़ की संख्या सिर्फ़ ChatGPT का एक्सेस पाने वाले छात्रों के करीब थी. उनके काम में लॉजिक ज़्यादा साफ़ था. साथ ही, उसमें वजह तलाशने और अपने अनुमानों पर सवाल उठाने के ज़्यादा संकेत मिले. कुल मिलाकर, इस ग्रुप में सबसे ज़्यादा तरह के सुधार दिखाई दिए. 

इस एक्सपेरिमेंट में छात्रों को अलग-अलग ग्रुप्स में रैंडम तरीके से बाँटा गया था. इससे रिसर्चर्स ChatGPT के एक्सेस और क्रिटिकल थिंकिंग की एक्सरसाइज़ के अलग-अलग असर को समझ पाए. साथ ही, वे यह भी देख पाए कि दोनों को साथ देने पर क्या असर होता है. यही वजह है कि छात्रों पर AI के असर और उनकी पढ़ाई को बेहतर तरीके से तैयार करने और सपोर्ट करने के तरीकों पर बढ़ती रिसर्च में यह एक्सपेरिमेंट काफ़ी काम का है. 

स्कूलों के लिए चुनौती

छात्रों पर इस एक्सरसाइज़ का असर और ग्रेडिंग के पारंपरिक तरीकों से मिले नतीजों के बीच का फ़र्क स्कूलों के सामने मौजूद एक बड़ी चुनौती दिखाता है. 

अगर AI छात्रों को एक्सपर्ट्स जैसा अच्छा काम तैयार करने में मदद कर सकता है, तो सिर्फ़ फ़ाइनल जवाब देखकर यह समझना मुश्किल होगा कि कोई छात्र वाकई में कितना समझ पाया है. 

कई टीचर्स पहले से इस सवाल पर काम कर रहे हैं कि असाइनमेंट्स और इवैल्यूएशन के तरीके बदलने चाहिए या नहीं. यह उस लंबे बदलाव का भी हिस्सा है जिसमें टेक्नोलॉजी और एजुकेशन समय के साथ साथ बदलते रहे हैं, ताकि आज की दुनिया में छात्रों के लिए ज़रूरी स्किल्स को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके.

इन नतीजों से पता चलता है कि छात्रों को सिर्फ़ सबसे आम या सबसे अच्छे तरीके से तैयार जवाब देने के लिए ही नहीं, बल्कि नए आइडियाज़, अच्छी सोच और कई तरीकों पर विचार करने वाले काम के लिए भी बेहतर स्कोर मिलना चाहिए. 

इससे साफ़ है: AI ने छात्रों के जवाब बेहतर बनाने में मदद की. क्रिटिकल थिंकिंग ट्रेनिंग ने उनके आइडियाज़ का दायरा बढ़ाया. भविष्य के लिए छात्रों को तैयार करने में दोनों की अपनी-अपनी और एक-दूसरे को पूरा करने वाली भूमिका है.