Third Moment Research कैसे 10,000 एजेंट्स को 36+ घंटे तक चलाता है
GPT‑6 Astra, GPT‑6.1 Sol, Codex और साइबर सिक्योरिटी के लिए Daybreak से यह AI लैब ऐसे एजेंट्स बनाती है, जो कई दिनों तक फ़ोकस कर सकते हैं और इस्तेमाल के साथ बेहतर होते जाते हैं.

10,000
एक साथ काम करने वाले एजेंट्स
36–48
हर ऑटोनॉमस रिसर्च सेशन में लगने वाले घंटे
97%
Codex की मदद से बैकटेस्ट में लगने वाले समय में कमी
1
ट्रिलियन OpenAI टोकन्स, एक दिन में
हर कंपनी के अपने वर्कफ़्लोज़, टूल्स, मुश्किल केसेज़ और सक्सेस मापने के तरीके होते हैं. (एक नई विंडो में खुलेगा)Third Moment Research(एक नई विंडो में खुलेगा) का मानना है कि सबसे अच्छे एजेंट्स वे हैं, जो किसी कंपनी के खास कामों को अच्छी तरह कर सकें और इस्तेमाल के साथ अपनी क्षमताएँ बेहतर बनाते रहें.
इसी सोच के साथ कंपनी ऐसा AI सिस्टम बना रही है, जो अपने आप बेहतर होता रहे. यह सिस्टम OpenAI के लेटेस्ट मॉडल्स की मदद से समझता है कि एजेंट्स कैसे काम करते हैं और कहाँ बार-बार दिक्कतें आती हैं. फिर उन दिक्कतों के आधार पर अपने आप हज़ारों सिम्युलेटेड सिनेरियो तैयार करता है. टीम इन सिनेरियो की मदद से एजेंट्स को बेहतर बनाती है और नई समस्याएँ सामने आने पर यही प्रोसेस दोहराती है.
Codex, GPT‑6 Astra, GPT‑6 Sol और GPT‑6.1 Sol इस सिस्टम के रिसर्च और कंप्यूटिंग से जुड़े कामों में मदद करते हैं. इनकी मदद से Third Moment एक साथ 10,000 एजेंट्स चला सकता है, जो 36 से 48 घंटे तक रिसर्च और जाँच करते हैं. कंपनी Daybreak का इस्तेमाल उन एनवायरनमेंट्स की सिक्योरिटी टेस्ट करने के लिए भी करती है, जिनमें एजेंट्स काम करते हैं.
"GPT-6.1 Sol एक ही सेशन में कई दिनों तक कंप्यूटेशनल रिसर्च जारी रख सकता है. इतने लंबे समय तक काम करने के बाद भी यह रिसर्च का कॉन्टेक्स्ट नहीं भूलता और सही दिशा में काम करता रहता है."
Third Moment ने शुरुआत में क्वांटिटेटिव फ़ाइनेंस में AI का इस्तेमाल किया, क्योंकि इस फ़ील्ड में सक्सेस को साफ़ तौर पर मापा जा सकता है. इससे टीम को यह समझने में मदद मिलती है कि एजेंट्स कैसे काम करते हैं और उन्हें कहाँ मुश्किल होती है. टीम रिसर्च एनवायरनमेंट में आने वाली समस्याओं को ढूँढने और ठीक करने के लिए Codex का इस्तेमाल करती है.
एक मामले में टीम ने Codex के साथ GPT‑5.6 का इस्तेमाल किया, जो उस समय सबसे नया GPT मॉडल था. इसकी मदद से हज़ारों रिकॉर्डेड सिम्युलेशन ट्रैजेक्टरीज़ का एनालिसिस किया गया. इनमें एजेंट्स के ऐक्शन्स और एनवायरनमेंट से मिले रिस्पॉन्स शामिल थे. साथ ही, टाइमस्टैम्प्स और कोडबेस की भी जाँच की गई.
Codex ने एक बड़ी समस्या पकड़ी. अमेरिकी शेयर मार्केट के एक साल के ऑर्डर-लेवल डेटा पर ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी की बैकटेस्टिंग करने में कई घंटे लग रहे थे. इस दौरान एजेंट्स बार-बार चेक करते थे कि काम पूरा हुआ या नहीं. इससे टोकन्स बेकार खर्च हो रहे थे और एजेंट्स का कॉन्टेक्स्ट स्टेटस चेक्स से भर रहा था.
Codex ने बैकटेस्ट की परफ़ॉर्मेंस, इनपुट्स और इस्तेमाल का एनालिसिस किया. इसके बाद उसने कैशिंग को बेहतर बनाने और मेमोरी में डेटा को कम जगह में रखने का तरीका ढूँढा. अलग-अलग सॉल्यूशन्स को टेस्ट करने के बाद उसने सुधारों को प्रोडक्शन में लागू किया. इससे बैकटेस्ट में लगने वाला समय लगभग 3 घंटे से घटकर सिर्फ़ 3 से 5 मिनट रह गया. टोकन्स का इस्तेमाल कम हुआ और कॉन्टेक्स्ट में गैरज़रूरी जानकारी भी कम भरने लगी. इससे एजेंट्स के पास आगे के एक्सपेरिमेंट्स के लिए टोकन का ज़्यादा बजट बचा.
Third Moment हर एजेंट को उसके काम के हिसाब से ज़रूरी टूल्स, जानकारी और एनवायरनमेंट देता है. क्वांटिटेटिव रिसर्च के लिए टीम डॉकर एनवायरनमेंट में डिफ़ॉल्ट Codex हार्नेस चलाती है. एजेंट्स को एक टेराबाइट डेटा, डॉक्यूमेंटेशन और एक रिसर्च रिपॉज़िटरी दी जाती है. इस रिपॉज़िटरी में फ़ीचर इंजीनियरिंग, GPU की मदद से मॉडल ट्रेनिंग, ट्रेडिंग स्ट्रैटेजीज़ और सिम्युलेशन के मॉड्यूल्स शामिल हैं.
GPT‑6 Astra, GPT‑6 Sol और GPT‑6.1 Sol रीज़निंग का काम संभालते हैं. वहीं, Codex हार्नेस एजेंट्स को काम करने, प्लान बनाने, लक्ष्य तय करने, सब-एजेंट्स शुरू करने और काम के दौरान कॉन्टेक्स्ट को छोटा करके मैनेज करने के टूल्स देता है.
कुछ एजेंट्स टास्क पूरा होने से पहले ही रुक जाते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए Third Moment, Codex को GPT‑6 Sol या GPT‑6.1 Sol से चलने वाले एक बड़े हार्नेस के अंदर सब-एजेंट की तरह इस्तेमाल करता है. अगर कोई टास्क अधूरा रह जाता है, तो बाहरी हार्नेस एजेंट के अब तक के काम की जाँच करता है. फिर तय करता है कि टास्क दोबारा चलाना है, बंद करना है या किसी व्यक्ति से उसका रिव्यू करवाना है.
"Codex हार्नेस कई सारे काम करता है और इसे कई अलग-अलग डोमेन में इस्तेमाल किया जा सकता है."
इस रिसर्च एनवायरनमेंट में एजेंट्स, Third Moment के इंजीनियर्स के बनाए शुरुआती ट्रेडिंग सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम करते हैं. वे पुराने डेटा पर ट्रेडिंग स्ट्रैटेजीज़ टेस्ट करते हैं और देखते हैं कि परफ़ॉर्मेंस में आया सुधार सच में काम का है या सिर्फ़ डेटा में सामान्य उतार-चढ़ाव का नतीजा है. हर टेस्ट के नतीजे के आधार पर वे अगला एक्सपेरिमेंट चुनते हैं. एडम के मुताबिक, एजेंट्स के काम से शुरुआती ट्रेडिंग सिस्टम की परफ़ॉर्मेंस बेहतर हुई है.

एडम के मुताबिक, GPT‑5.5 से पहले मॉडल्स सिर्फ़ यूज़र के बताए एक्सपेरिमेंट्स ही कर सकते थे. GPT‑5.5 और GPT‑5.6 के आने के बाद Codex हार्नेस के साथ काम करने वाले मॉडल्स के नतीजों के आधार पर अगले एक्सपेरिमेंट्स की प्लानिंग भी करने लगे. अब GPT‑6 Astra, GPT‑6 Sol और GPT‑6.1 Sol की मदद से एजेंट्स सैकड़ों एक्सपेरिमेंट्स और सब-एजेंट्स को एक साथ चलाकर समस्याओं की असली वजह ढूँढ सकते हैं.
इस सुधार से एजेंट्स रिसर्च के ऐसे पहलुओं पर भी काम कर पा रहे हैं, जिनके बारे में टीम ने पहले सोचा नहीं था. एक सेशन में GPT‑6.1 Sol ने एक एक्सचेंज पर ऐसी ट्रेड्स का असर पहचाना जो आम तौर पर दिखाई नहीं देतीं. इन ट्रेड्स की कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम में उम्मीद से कहीं ज़्यादा हिस्सेदारी थी. एडम कहते हैं, "यह ऐसा नतीजा था जिसकी हमें उम्मीद नहीं थी और हमारी रिसर्च टीम ने शुरुआत में इस पर ध्यान भी नहीं दिया था."
Third Moment ऑप्टिमाइज़ेशन, मशीन लर्निंग सिस्टम्स और क्वांटिटेटिव रिसर्च से जुड़े कामों में मॉडल्स की परफ़ॉर्मेंस परखता है. यह सबसे एडवांस मॉडल्स की नई रिलीज़ को उनकी सबसे हाई रीज़निंग सेटिंग्स पर टेस्ट करता है. इसमें देखा जाता है कि मॉडल्स रिपॉज़िटरीज़ में कितनी आसानी से काम कर सकते हैं, कितना एफ़िशिएंट कोड लिखते हैं और कितने लंबे समय तक रिसर्च जारी रख सकते हैं. फ़िलहाल GPT‑6 Luna की भी टेस्टिंग हो रही है.
"फ़िलहाल हम GPT-6.1 Sol का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि यह कम टोकन्स में बेहतर काम करता है. यह कम-से-कम टोकन्स इस्तेमाल करके टास्क पूरा करता है और GPT-6 Astra जैसी परफ़ॉर्मेंस देता है."
एक बेंचमार्क में एजेंट्स को लाइव स्कोरबोर्ड सर्विस के अपडेट होने में लगने वाला समय कम करना होता है, वह भी आउटपुट बदले बिना. स्पीड में सुधार मापने के लिए टीम एक एक्सपर्ट के बनाए सॉल्युशन्स के औसत रन टाइम को उसी हार्डवेयर पर मॉडल के समाधान के रन टाइम से भाग देती है. इसके लिए मॉडल का जवाब सही होना भी ज़रूरी है. एडम के मुताबिक, GPT‑6 Astra ने स्पीड में सबसे ज़्यादा सुधार किया.
सिम्युलेशन सिस्टम में किसी खास सिक्योरिटी कमी की जाँच जैसे कामों के लिए टीम GPT‑5.6 Terra जैसे ज़्यादा एफ़िशिएंट मॉडल्स इस्तेमाल करती है. लेकिन डीप रिसर्च के लिए एडम का मानना है कि बेहतर रीज़निंग पर ज़्यादा खर्च करना फ़ायदेमंद हो सकता है. वे कहते हैं, "क्वांटिटेटिव फ़ाइनेंस में कोई अहम सिग्नल ढूँढ लेना बहुत ज़्यादा फ़ायदेमंद हो सकता है."
Third Moment के 10,000 एजेंट्स अपने आप काम करते हैं. इसलिए कंपनी को बड़े पैमाने पर अपने रिसर्च एनवायरनमेंट्स की सिक्योरिटी टेस्ट करने का तरीका चाहिए. टीम सिम्युलेशन शुरू होने से पहले यह टेस्टिंग ऑटोमेट करने के लिए Daybreak साइबर सिक्योरिटी प्लेटफ़ॉर्म इस्तेमाल करती है.
इन टेस्ट्स में जाँचा जाता है कि क्या कोई एजेंट अपने रिसर्च एनवायरनमेंट से बाहर निकलकर बड़े नेटवर्क को एक्सेस कर सकता है. एडम कहते हैं, "Daybreak की मदद से हम एजेंट्स से ही सिम्युलेशन की पेनेट्रेशन टेस्टिंग करवा सकते हैं. इससे हम उसके इंफ़्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी को भी टेस्ट कर पाते हैं."
"Daybreak के बिना हम इतने बड़े पैमाने पर इसकी ऑटोमेटेड टेस्टिंग नहीं कर पाते."
Third Moment का लक्ष्य एजेंट्स को कंपनियों के रोज़मर्रा के खास कामों में भी इस्तेमाल करना है. उदाहरण के लिए, किसी रिटेल बिज़नेस में स्टॉक कम होने या सप्लायर से सामान मिलने में देरी होने पर एजेंट्स बेहतर सप्लाई चेन से जुड़े फ़ैसले लेने में मदद कर सकते हैं. इंजीनियरिंग टीम के लिए वे बड़े कोडबेस में परफ़ॉर्मेंस धीमी होने की वजह ढूँढ सकते हैं. वहीं, बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स के साथ काम करने वाले बिज़नेस में एजेंट्स यह पता लगा सकते हैं कि एक डॉक्यूमेंट में किए गए वादे दूसरे डॉक्यूमेंट में दर्ज नतीजों से कहाँ मेल नहीं खाते.
GPT‑6 Astra, GPT‑6 Sol और GPT‑6.1 Sol की रीज़निंग क्षमताओं की मदद से Third Moment अब अलग-अलग रिसर्च टास्क्स से आगे बढ़कर लाखों सब-एजेंट्स को एक साथ काम करने के लिए तैयार करना चाहता है. कंपनी की आगे की योजना में ट्रिलियन्स टोकन्स का इस्तेमाल करके ऐसे दर्जनों एक्सपेरिमेंट्स की सीरीज़ चलाना शामिल है, जिनमें हर अगला एक्सपेरिमेंट पिछले नतीजों पर निर्भर हो. इसका मकसद इस रिसर्च की मदद से नई समस्याएँ आने पर एजेंट्स को अपने आप बेहतर बनाना है.
एडम के मुताबिक, इससे लोग इस बात पर ज़्यादा ध्यान दे पाएँगे कि एजेंट्स कैसे सीखें और काम करें. वे कहते हैं, "इससे लोग अपनी क्षमता का कहीं बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे. रिसर्च खुद करने के बजाय वे यह सोचने पर फ़ोकस कर पाएँगे कि रिसर्च कैसे की जाए और उसके प्रोसेस को और बेहतर कैसे बनाया जाए."


