सेंटिनलवन: मैलवेयर विश्लेषण अब हफ़्तों के बजाय घंटों में
OpenAI डेब्रेक से सेंटिनलवन हफ़्तों का मैलवेयर विश्लेषण घंटों में करता है, जिससे अधिक ख़तरों की जाँच संभव होती है.

8
मैलवेयर की रिवर्स इंजीनियरिंग में लगने वाले घंटे, पहले लगते थे 4–6 हफ़्ते
किसी जटिल मैलवेयर की रिवर्स इंजीनियरिंग में एक शीर्ष सुरक्षा शोधकर्ता को चार से छह हफ़्ते लग सकते हैं. इस काम में बहुत बारीकी से जाँच करनी पड़ती है. शोधकर्ता सॉफ़्टवेयर के अलग-अलग हिस्सों को खोलकर समझते हैं कि वह कैसे काम करता है. नई जानकारी मिलने पर उन्हें अक्सर पिछले चरणों पर लौटना पड़ता है. सेंटिनलवन के मुख्य एआई अधिकारी ग्रेगर स्टुअर्ट कहते हैं कि OpenAI डेब्रेक अब लगभग आठ घंटों में इंसानों के स्तर की गुणवत्ता वाली रिवर्स इंजीनियरिंग कर सकता है.
गहन विश्लेषण में लगने वाला समय घटाकर OpenAI सेंटिनलवन के शोधकर्ताओं को अधिक मैलवेयर की जाँच करने और अलग-अलग नमूनों से मिले निष्कर्षों को आपस में जोड़ने का अवसर देता है. इस व्यापक नज़रिए से अक्सर ऐसे संबंध सामने आते हैं जो अलग-अलग की गई जाँचों में छूट सकते हैं. स्टुअर्ट इस अवसर को “ऐसी जानकारी पाने का ज़रिया बताते हैं, जिसे जुटाने के लिए पहले हमारे पास कभी पर्याप्त संसाधन नहीं थे.”
“जिस काम में किसी बेहतरीन शोधकर्ता को चार या छह हफ़्ते लगते, एआई अब लगभग आठ घंटों में उसे इंसानों के स्तर की गुणवत्ता के साथ कर रहा है.”
डेब्रेक सुरक्षा में जुटे लोगों को साइबर सुरक्षा के काम के लिए OpenAI मॉडल उपलब्ध कराता है. सेंटिनलवन इन क्षमताओं का इस्तेमाल मैलवेयर की रिवर्स इंजीनियरिंग में करता है. इसमें सॉफ़्टवेयर की जाँच करके यह समझा जाता है कि वह कैसे काम करता है. विश्लेषण तेज़ होने से उसके शोधकर्ता और अधिक नमूनों की जाँच कर पाते हैं.
स्टुअर्ट ज़ोर देते हैं कि परिणाम की ज़िम्मेदारी अब भी उनकी टीम की ही है. वे कहते हैं, “जवाबदेही ही वह इकलौती चीज़ है जिसे स्वचालित नहीं किया जा सकता.” “सॉफ़्टवेयर की संरचना बदलने के फ़ैसले का उदाहरण लें. ऐसे फ़ैसले पर आप अब भी किसी इंसान की निगरानी चाहेंगे. वहीं, किसी खास हिस्से में सुधार या ऐसे बदलाव जो सॉफ़्टवेयर के काम करने के मूल तरीके को नहीं बदलते, स्वचालन के लिए ज़्यादा उपयुक्त हो सकते हैं,” वे आगे कहते हैं.
पहले सेंटिनलवन की शोध टीमों को गहन जाँच केवल उन्हीं ख़तरों तक सीमित रखनी पड़ती थी जो उन्हें सबसे दिलचस्प या महत्वपूर्ण लगते थे. स्टुअर्ट कहते हैं, “हम बहुत कम सॉफ़्टवेयर की ही रिवर्स इंजीनियरिंग कर पाते थे.” तुलना के लिए कम नमूने होने से ख़तरों के बीच संबंध पहचानने के अवसर भी कम मिलते थे.
“तेज़ रिवर्स इंजीनियरिंग से हम मैलवेयर की दुनिया के कहीं बड़े हिस्से को समझ सकते हैं और उसमें हो रहे बदलावों के साथ कदम मिला सकते हैं. इससे हमारे शोधकर्ता बेहतर ढंग से समझ पाते हैं कि ख़तरे आपस में कैसे जुड़े हैं और ये संबंध समय के साथ कैसे बदलते हैं.”
डेब्रेक से तेज़ विश्लेषण होने पर शोधकर्ताओं को मैलवेयर के नमूनों की तुलना करने और उनमें समान घटक खोजने के ज़्यादा अवसर मिलते हैं. उदाहरण के लिए, ऊपर से असंबंधित दिखने वाले दो नमूनों में एक ही घटक मिलने पर शोधकर्ताओं को ऐसा सुराग मिल सकता है, जिसके आधार पर वे किसी ग्राहक के लिए की जा रही जाँच को आगे बढ़ा सकें.
अधिक नमूनों से मिले निष्कर्षों की तुलना करने पर ख़तरों के बीच व्यापक संबंध भी सामने आते हैं. स्टुअर्ट कहते हैं कि इन संबंधों को समझने से “आप ख़तरों को और पहले रोक पाएँगे और बचाव की तैयारी पहले से कर सकेंगे.”
स्टुअर्ट कहते हैं कि OpenAI की साइबर क्षमताएँ उपलब्ध होने से सेंटिनलवन में अधिक लोग सुरक्षा के काम की ज़िम्मेदारी सँभाल पा रहे हैं. वे कहते हैं, “अब लगभग हर किसी के पास उस तरह की विशेषज्ञता उपलब्ध है, जो शायद कुछ महीने पहले तक भी बहुत मुश्किल से मिलती थी.” अब टीम के अधिक सदस्य विशेषज्ञों के एक छोटे समूह पर निर्भर रहने के बजाय खुद समस्याओं की जाँच कर सकते हैं.
स्टुअर्ट कोड लिखने की प्रक्रिया में OpenAI की साइबर क्षमताएँ शामिल करना चाहते हैं, ताकि सेंटिनलवन के डेवलपर सॉफ़्टवेयर बनाते समय ही सुरक्षा संबंधी समस्याएँ दूर कर सकें.
“विकास दल के हर सदस्य को विशेषज्ञ स्तर की साइबर क्षमताएँ देकर OpenAI सुरक्षा में जुटे लोगों का पलड़ा भारी कर रहा है.”


