Pollo AI, OpenAI से क्रिएटिव आइडियाज़ को कैंपेन में बदलता है
GPT‑5.6, GPT‑6 Astra और GPT‑Image‑2.5 की मदद से Pollo AI पर क्रिएटर्स अपने अनोखे आइडियाज़ को शानदार इमेजेज़ और फ़िल्मों जैसी क्वालिटी वाले वीडियो ऐड्स में बदल सकते हैं.

Pollo AI(एक नई विंडो में खुलेगा) की शुरुआत इस सोच के साथ हुई थी कि लोग प्रोडक्शन की एक्सपर्टीज़ के बिना भी अपने क्रिएटिव आइडियाज़ को तैयार इमेजेज़ और वीडियो में बदल सकें. जेनरेटिव AI होने के बावजूद, क्रिएटर्स और मार्केटर्स के लिए अलग-अलग टूल्स का इस्तेमाल करना और मनचाहे रिज़ल्ट के लिए सही मॉडल चुनना मुश्किल हो सकता है. कुछ लोग तो परेशान होकर अपने प्रोजेक्ट्स बीच में ही छोड़ देते हैं.
Pollo AI के फ़ाउंडर और CEO बिल झू बताते हैं, "हम वीडियो के मामले में ऐसा कुछ करना चाहते हैं, जो Canva ने डिज़ाइन के लिए किया. हम वीडियो बनाना इतना आसान करना चाहते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर सकें, सिर्फ़ वे नहीं जिन्हें पहले से वीडियो बनाना आता है." आज Pollo AI के 2.6 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स हैं, जो इस प्लेटफ़ॉर्म पर वीडियो, ऐड्स और विज़ुअल कंटेंट बनाते हैं.
"जैसे-जैसे OpenAI के मॉडल्स बेहतर हुए हैं, Pollo जिन वर्कफ़्लोज़ के साथ काम करना चाहता था, उनमें से ज़्यादातर वर्कफ़्लोज़ अब सीधे प्रोडक्ट के अंदर आ गए हैं. इसका मतलब है कि यूज़र्स अब आसान इनपुट्स से शुरुआत कर सकते हैं, प्रोसेस को समझने में कम समय लगता है और ज़्यादा भरोसेमंद तरीके से बेहतर रिज़ल्ट पा सकते हैं."
टीम की पहली बड़ी सफलता वीडियो टेम्प्लेट्स थे. अब क्रिएटर्स के 30% सेशन्स की शुरुआत इन्हीं टेम्प्लेट्स या ट्रेंडिंग फ़ॉर्मैट वाले वर्कफ़्लोज़ से होती है. इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए कंपनी ने अपना नया प्रोडक्ट Pollo Agent लॉन्च किया है. यह GPT‑6 Astra और GPT‑Image‑2.5 जैसे OpenAI मॉडल्स का इस्तेमाल करके वीडियो बनाने के पूरे प्रोसेस में यूज़र्स को गाइड करता है. इसी की मदद से Pollo AI के एक यूज़र ने तबाही के बाद की दुनिया पर आधारित यह एडवेंचर वीडियो बनाया.
Pollo Agent यूज़र के शुरुआती आइडियाज़ और विज़ुअल रेफ़रेंसेज़ को समझकर स्टोरीलाइन, सीन के फ़्लोज़ और स्क्रिप्ट तैयार करता है. CTO पीटर झोउ के मुताबिक, OpenAI के मॉडल्स ऐसे क्रिएटिव इनपुट्स को भी अच्छी तरह समझते हैं जो पूरी तरह साफ़ नहीं होते. साथ ही, इनकी मल्टीमोडल क्षमता भी काफ़ी अच्छी है. वे बताते हैं, "इस मामले में GPT‑5.6 ने खास तौर पर अच्छा परफ़ॉर्म किया." टीम ने OpenAI API की भरोसेमंद परफ़ॉर्मेंस और नियमित रिलीज़ को भी अहम बताया.
रीज़निंग की क्षमता, स्पीड और खर्च के बीच सही बैलेंस बनाने के लिए Pollo AI, टास्क की राउटिंग में GPT‑5.6 का इस्तेमाल करता है. वहीं, स्टोरी तैयार करने या सीन्स में बदलाव की प्लानिंग जैसे मुश्किल कामों के लिए GPT‑6 Astra का इस्तेमाल करता है. मॉडल्स के इस कॉम्बिनेशन से सिस्टम यूज़र के प्रॉम्प्ट के हिसाब से हर टास्क के लिए सही लेवल की रीज़निंग इस्तेमाल कर पाता है. Pollo AI के मुताबिक, अब यूज़र्स को मॉडल चुनने या बदलने में 50% से भी कम समय लगता है, जिससे वे क्रिएटिव काम पर ज़्यादा समय दे पाते हैं.
Pollo AI असली यूज़र्स के प्रॉम्प्ट्स और वर्कफ़्लोज़ पर जेनरेटिव मॉडल्स की टेस्टिंग करता है. इसमें आउटपुट की क्वालिटी, लगातार एक जैसे अच्छे रिज़ल्ट देने की क्षमता, अलग-अलग स्टाइल में कंटेंट बनाने की क्षमता, स्पीड और खर्च को परखा जाता है. इमेज जेनरेशन के लिए GPT‑Image‑2.5 चुना गया है, जो क्रिएटर्स को पोस्टर्स, स्टोरीबोर्ड्स और कैंपेन विज़ुअल्स बनाने में मदद करता है.
"जब भी कोई यूज़र इमेज बनाने का टास्क देता है, तो हम हमेशा GPT-Image-2.5 का इस्तेमाल करते हैं. यह अलग-अलग तरह के कैरेक्टर्स और अक्षरों के साथ काम करने में बहुत अच्छा है."
Pollo AI के ज़्यादातर यूज़र्स कंटेंट क्रिएटर्स हैं. यह प्लेटफ़ॉर्म AI और असली ऐक्टर्स की मदद से छोटे ड्रामा वीडियो बनाने के लिए खास तौर पर मशहूर है. हालाँकि, अब ज़्यादा मार्केटर्स और बिज़नेस ओनर्स भी तेज़ी से और आसानी से वीडियो कंटेंट बनाने के लिए Pollo AI का इस्तेमाल करने लगे हैं.
Pollo के मार्केटिंग स्टूडियो सुइट में मौजूद फ़ोटो-टू-वीडियो ऐड टूल, OpenAI मॉडल्स की मदद से किसी फ़ोटो और प्रॉम्प्ट को छोटे वीडियो में बदलता है. यह टूल छोटे बिज़नेसेज़ और DTC ब्रैंड्स के लिए बनाया गया है, ताकि वे सोशल मीडिया के लिए प्रोडक्ट ऐड्स कई दिनों के बजाय कुछ ही मिनटों में बना सकें.
Pollo AI के एक यूज़र प्रोडक्ट फ़ोटो से परफ़्यूम का ऐसा ऐड बनाना चाहते थे, जो लग्ज़री फ़ील दे. लेकिन सिर्फ़ एक फ़ोटो से वह माहौल नहीं बन पा रहा था और प्रोफ़ेशनल वीडियो शूट उनके बजट से बाहर था.
फ़ोटो-टू-वीडियो ऐड की मदद से यूज़र ने अपनी फ़ोटो को लगभग 15 सेकंड के वीडियो ऐड में बदल दिया. टूल ने मखमली टेक्सचर, हल्की सुनहरी स्पॉटलाइट्स और बोतल के क्लोज़-अप दिखाकर पूरे वीडियो में लग्ज़री माहौल बनाया. वीडियो के आखिर में परफ़्यूम की बोतल गहरे लाल कपड़े के बैकग्राउंड पर दिखाई गई.
एक और कस्टमर, जो एक ज्वेलरी ब्रैंड था, अपने कैंपेन के लिए बोल्ड और मैगज़ीन जैसी स्टाइल वाली इमेज बनाना चाहता था. लेकिन बड़े और क्रिएटिव स्टूडियो शूट के लिए उसका बजट काफ़ी नहीं था.
Pollo Agent और GPT‑Image‑2.5 की मदद से ब्रैंड अपने क्रिएटिव आइडिया को असल इमेज में बदल पाया. इसमें एक मॉडल चीते के पास बैठी थी और उसने ब्रैंड की आकर्षक, बड़े डिज़ाइन वाली ज्वेलरी पहनी हुई थी. टूल ने गहरे रंग के पर्दों और हल्की सुनहरी रोशनी से सीन तैयार किया, ताकि ब्रैंड की ज्वेलरी साफ़ और खास तौर पर दिखाई दे.
कस्टमर को लग्ज़री कैंपेन के लिए तैयार इमेज मिल गई. असली शूट के मुकाबले इसे बनाने में कम मेहनत, समय और पैसा लगा.

Pollo AI की मदद से कस्टमर्स एक साधारण प्रोडक्ट फ़ोटो को OpenAI मॉडल्स के ज़रिए कहीं ज़्यादा क्रिएटिव इमेज में आसानी से बदल सकते हैं. मिसाल के लिए, एक बेवरेज ब्रैंड अपने पीच सोडा के ऐड कैंपेन को मज़ेदार और कल्पनाओं से भरा दिखाना चाहता था. लेकिन स्टूडियो में ली गई साधारण प्रोडक्ट फ़ोटो से टीम का आइडिया पूरी तरह सामने नहीं आ पा रहा था.
टीम ने Pollo Agent और GPT‑Image‑2.5 की मदद से बोतल की एक साधारण फ़ोटो को बर्फ़ से ढके छोटे-से नज़ारे में बदल दिया. इसमें एक ट्रेन, छिपकलियाँ और चमकती हुई बूँदें भी थीं. GPT‑Image‑2.5 की मदद से क्रिएटिव वर्कफ़्लोज़ में ज़्यादा साफ़ डिटेल्स के साथ तेज़ी से इमेज बनाई जा सकती हैं. तैयार इमेज में एक मज़ेदार सीन था, जिसे ब्रैंड अपने कैंपेन में इस्तेमाल कर सकता था.

Pollo चाहता है कि अगले 12 महीनों में AI वीडियो रोज़मर्रा के कंटेंट क्रिएशन का हिस्सा बन जाए. झू के मुताबिक, इसके लिए किसी आइडिया को ऐसे कंटेंट में बदलना और आसान बनाना होगा, जिसे तुरंत पोस्ट किया जा सके, टेस्ट किया जा सके या किसी कैंपेन में इस्तेमाल किया जा सके. OpenAI के मॉडल्स और इमेज जेनरेशन टेक्नोलॉजी में लगातार हो रहे सुधार से Pollo AI के लिए ऐसा करना आसान हो रहा है.
वे कहते हैं, "हमें लगता है कि AI के आने से कंटेंट क्रिएशन में ऐसे प्रोडक्ट्स को ज़्यादा फ़ायदा होगा, जिनसे शुरुआत से ही बार-बार अच्छी क्वालिटी का कंटेंट बनाना आसान हो. इसके लिए बेहतर फ़ॉर्मैट्स, कम ट्रायल और एरर और मॉडल्स के साथ काम करने का आसान वर्कफ़्लो ज़रूरी है."


