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OpenAI

29 सितंबर 2025

APIOpenAI on OpenAI

OpenAI में इनबाउंड लीड्स को कस्टमर्स में बदलना

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ये हमारी उस सीरीज़ का एक हिस्सा है जिसमें बताया गया है कि किस तरह OpenAI हमारी टेक्नोलॉजी पर अपने खुद के सॉल्यूशन्स डेवलप कर रहा है.

जब ChatGPT Enterprise और Business दोनों लॉन्च हुए, तो इनबाउंड डिमांड बढ़ गई. हर महीने हज़ारों कंपनियां—शुरूआती स्टेज के स्टार्टअप्स से लेकर मल्टीनेशनल एंटरप्राइज़ेज़ तक—संपर्क कर रही थीं. डिमांड बहुत ज़्यादा थी. हमारे सिस्टम्स पर दबाव असली था.

उन लीड्स को फ़ॉर्म्स और स्थिर वर्कफ़्लो के ज़रिये रूट करना उस समय की ज़रुरत को पूरा नहीं कर सका. बहुत से संभावित कस्टमर्स को ऑटोमेटेड जवाब मिला जिसमें उन्हें ऑनलाइन साइन अप करने के लिए कहा गया. बहुत कम लोगों को उनके सवालों का जवाब मिला. इसका रिज़ल्ट ये हुआ कि हमने कई मौके गंवा दिए और खरीदारी का अनुभव कस्टमर्स के उस भरोसे के अनुरूप नहीं था जो वे हम पर रख रहे थे.

चुनौती सिर्फ़ पैमाने की नहीं थी. वो क्वालिटी का सवाल था. खरीदार ख़ास और सही जवाब चाहते थे:

  • क्या ये प्रोडक्ट हेल्थकेयर एन्वायर्नमेंट के अनुरूप है?
  • हम प्लैन्स की तुलना कैसे करें और सही प्लैन कैसे चुनें?
  • हमारी इंडस्ट्री में हमारे पीयर्स को क्या रिज़ल्ट्स देखने को मिल रहे हैं?

"हमें हर महीने हज़ारों लीड्स मिल रही थीं लकिन हमारी कैपेसिटी उनमें से सिर्फ़ एक छोटे-से हिस्से से ही बात करने की ही थी." गो-टू-मार्केट इनोवेशन की Harsha Chilakamarri कहती हैं, "कुछ लीड्स को वाकई में एक बेहतरीन खरीदारी अनुभव बनाने के लिए कुछ सवालों के जवाब की ज़रुरत थी, लेकिन हम वो पर्सनलाइज़्ड अनुभव नहीं दे पा रहे थे."

सामान्य ऑटोमेशन उस नाज़ुक अंतर को समझ नहीं सकता था. सीधे तरीके से कर्मचारियों को बढ़ाना टिकाऊ नहीं था. हमें एक अलग अप्रोच की ज़रुरत थी.

इनबाउंड सेल्स असिस्टेंट बनाना

हमने एक AI की मदद से काम करने वाला इनबाउंड सेल्स असिस्टेंट बनाया है, जिसे प्रतिनिधियों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है—जिसे प्रतिनिधियों के फ़ीडबैक के साथ ट्रेन और रिफ़ाइन किया गया है.

इसके मूल में हमारे इंटर्नल कनेक्र्सर हैं. प्रोडक्ट डॉक्यूमेंटेशन, पॉलिसी लाइब्रेरीज़, कस्टमर स्टोरीज़ और प्लेबुक्स को उस कॉन्टेक्स्ट में खींचा जाता है जिस पर मॉडल रीज़निंग कर सकता है. असिस्टेंट अंदाज़ा नहीं लगाता. ये संभावित ग्राहक की भाषा में, उनके सवाल से सीधे जुड़ा हुआ, एक्यूरेसी के साथ जवाब देता है.

इसका मतलब ये है कि संभावित कस्टमर्स को कुछ ही मिनटों में उनकी अपनी भाषा में लिखित और उनके एक्चुअल सवाल पर आधारित पर्सनलाइज़्ड जवाब मिल जाता है.

  • टोक्यो में एक कंपनी को अंग्रेज़ी में नहीं बल्कि जापानी में जवाब मिला.
  • कंप्लायंस के बारे में पूछने वाले एक हॉस्पिटल सिस्टम को पहले ही एक्सचेंज में जानकारी मिल जाती है, न कि कई दिनों तक इंतज़ार करने के बाद.
  • अगर संभावित ग्राहक एंटरप्राइज़-क्वालिफ़ाइड है, तो कॉन्टेक्स्ट को बरकरार रखते हुए, थ्रेड को एक प्रतिनिधि को सौंप दिया जाता है.

Chilakamarri कहती हैं, "ये मॉडल हमें हरेक कस्टमर के साथ जुड़ने और उसे एक बेहद पर्सनलाइज़्ड अनुभव प्रदान करने में मदद करता है."

ये सिर्फ़ ऑटोमेशन के लिए ऑटोमेशन नहीं है. ये ऑटोमेशन ही है जो तुरंत वैल्यू डिलीवर करता है.

प्रतिनिधि के साथ, प्रतिनिधि के लिए बनाया गया

ये सफ़लता सिर्फ़ असिस्टेंट के पहले जवाब से नहीं मिली. ये इसके पीछे का लूप था.

मॉडल को ट्रेन करते समय, हरेक ड्राफ़्ट जवाब को सुधार के लिए सेल्स रेप्स के पास वापस भेजा गया. हरेक सुधार ट्रेनिंग डेटा बन गया. कुछ ही हफ़्तों में एक्यूरेसी 60 प्रतिशत से बढ़कर 98 प्रतिशत से भी ज़्यादा हो गई. सामान्य टेम्पलेट्स के बजाय, असिस्टेंट हमारी टीम के सबसे बेहतरीन वर्ज़न की तरह बोलने लगा, जजमेंट को कोडिफ़ाई करने लगा और उसे बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने लगा.

"हमने सिर्फ़ मेरे और एक दूसरे इंजीनियर के साथ एक बहुत ही मुश्किल मूल्यांकन सिस्टम बनाया... एक बार जब हमारे पास उन मूल्यांकनों को करने का एक तरीका होता, ख़ास तौर से एक ऑटोमैटिक तरीके से, हम जल्दी से 60% एक्यूरेसी से 90% तक जाने में सक्षम थे, और अब पहले ईमेल पर 98% तक."
Harsha Chilakamarri, Go-to-Market Innovation

प्रतिनिधियों के लिए, ये बदलाव तुरंत महसूस हुआ. इनबॉक्स में बेकार लीड्स नहीं थीं. उन्होंने उन संभावित ग्राहकों के साथ बातचीत शुरू की, जो सच में खरीदने में रुचि रखते थे और जिनके सवालों का जवाब पहले ही दिया गया था

इन मूल्यांकन से लीडरशिप को भी आत्मविश्वास मिला. उन्होंने सिर्फ़ कहानियां नहीं, बल्कि मापने लायक प्रोग्रेस दिखाया. उन्होंने साबित कर दिया कि असिस्टेंट को ज़िम्मेदारी से नियुक्त किया जा सकता है.

छूटे हुए लीड्स से उच्च विकास तक 

इसका असर तुरंत महसूस हुआ. एक छोटी-सी कंपनी जो एक बार कतार में खो गई थी, उसने सवाल सबमिट किए, कुछ ही घंटों में उसे सोच-समझ कर दिए गए जवाब मिल गए, और कुछ ही दिनों बाद उसने एक एंटरप्राइज़ कॉन्ट्रैक्ट पर साइन कर दिए. वे कहानियां बार-बार दोहराती गईं.

जो एक डेड एंड थी, वो हमारे सबसे मज़बूत ग्रोथ चैनल्स में से एक बन गई. कुछ ही महीनों में, करोड़ों रुपये का सालाना रिकरिंग रेवेन्यु प्राप्त हो गया.

"हमारा सबसे बड़ा अहा पल तब था जब हमने पहली बार असिस्टेंट लॉन्च किया था. हमने महसूस किया कि अगर हम इनबाउंड लीड्स को पर्सनलाइज़्ड अनुभव देते हैं और ज़रूरी सवालों का जल्दी जवाब देते हैं—यहां तक ​​कि ईमेल पर भी—तो कई लोग वाकई में तुरंत खरीदारी करने के लिए उत्सुक होते हैं.”
Harsha Chilakamarri, Go-to-Market Innovation

क्वालिफ़ाइड लीड्स प्राप्त करने वाले प्रतिनिधियों के लिए भी ये बदलाव उतना ही कीमती था. सामान्य सुरागों को खंगालने के बजाय, उन्होंने क्लियर इरादे के साथ एक्टिव बातचीतें देखी. पहली बार किसी को भी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वो पीछे छूट गया है.

जुड़ाव के लिए एक नया स्टैंडर्ड

ये सिर्फ़ इनबाउंड लीड्स की बात नहीं है. ये एक बड़े अवसर की ओर इशारा करता है: ऑनबोर्डिंग, रिन्यूअल्स और सपोर्ट सभी भरोसेमंद, पर्सनलाइज़्ड बातचीतों से फ़ायदा उठा सकते हैं.

सबक सिंपल है: जब आप अपने बेस्ट प्रतिनिधियों की उत्कृष्टता को AI के ज़रिये बढ़ाते हैं, तो आप पूरी टीम के लिए जो मुमकिन है उसे बदल देते हैं.

जैसा कि Chilakamarri ने कहा: "लीडरशिप इससे बेहद उत्साहित था. ये इस बात का सबूत है कि हम OpenAI पर OpenAI का निर्माण कर सकते हैं और अपनी तकनीक को सीधे कस्टमर्स के सामने प्रदर्शित कर सकते हैं.”

हर लीड को पर्सनलाइज़ करना कोई टैक्टिक नहीं है. ये सभी तरह की सहभागिता के लिए एक बेहतर तरीका बनता जा रहा है.

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