OpenAI में कॉन्ट्रैक्ट्स को सर्चेबल डेटा में बदलना
ये हमारी उस सीरीज़ का एक हिस्सा है जिसमें बताया गया है कि किस तरह OpenAI हमारी टेक्नोलॉजी पर अपने खुद के सॉल्यूशन्स डेवलप कर रहा है.
हर बड़े डील के साथ एक साइन किया हुआ कॉन्ट्रैक्ट आता है. हर कॉन्ट्रैक्ट में स्टार्ट डेट, बिलिंग टर्म्स और रिन्यूअल क्लॉज़ होते हैं.
शुरुआत में ये प्रक्रिया आसान थी: एक-एक लाइन पढ़ो, स्प्रेडशीट में डालो और आगे बढ़ो. लेकिन जैसे ही वॉल्यूम डबल होता गया, ये मैनुअल तरीका गड़बड़ाने लगा.
“छह महीने से भी कम में, टीम हर महीने सैकड़ों कॉन्ट्रैक्ट देखने से बढ़कर हज़ार से ज़्यादा हैंडल करने लगी. और तब भी हमने सिर्फ़ एक नया बंदा हायर किया था. साफ़ था कि ये प्रोसेस इस तरह नहीं चल सकता,” कहते हैं AI इंजीनियर Wei An Lee.
ज़्यादा लोगों को समस्या पर झोंकने के बजाय, हमारी फ़ाइनेंस और इंजीनियरिंग टीम ने एक कॉन्ट्रैक्ट-डेटा एजेंट बनाया. लक्ष्य सीधा था: कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू में रिपीटीशन हटाना और पूरा कंट्रोल एक्सपर्ट्स के हाथों में रखना.
एजेंट तीन स्टेप में काम करता है:
- डेटा इकट्ठा करना: PDF, स्कैन कॉपियाँ, और यहाँ तक कि हैंड-राइटन एडिट्स वाली फ़ोन फ़ोटो भी. जो पहले अलग-अलग और असंगत फाइलें हुआ करती थीं, अब सब एक ही पाइपलाइन में आ जाती हैं.
- प्रॉम्प्ट-आधारित इनफेरेंस सिस्टम एक तरह की retrieval-augmented प्रॉम्प्टिंग का इस्तेमाल कर के पहले ज़रूरी जानकारी ढूँढता है, फिर कॉन्ट्रैक्ट को पार्स करके स्ट्रक्चर्ड डेटा बनाता है. यह हज़ारों पन्नों को एक साथ नहीं डालता; सिर्फ़ प्रासंगिक हिस्से खींचता है, उन पर सोचता है और अपना काम - कि कैसे पहुँचा, क्या निकाला - वो दिखाता है.
- रिव्यू: फ़ाइनेंस के एक्सपर्ट्स उस संरचित आउटपुट की जाँच करते हैं, नोट्स और रेफ़रेंस के साथ, खासकर जहाँ टर्म्स सामान्य नहीं होते. एजेंट असामान्य चीज़ें हाइलाइट कर देता है; उसके बाद एक्सपर्ट्स रिव्यू के लिए शामिल होते हैं.
“हम सिर्फ़ डेटा को पार्स नहीं कर रहे हैं—हम यह भी बताते हैं कि किसी टर्म को गैर-मानक क्यों माना गया, इसके पीछे की वजह दिखाते हैं, रेफ़रेंस भी देते हैं, और रिव्युअर को ASC 606 क्लासिफ़िकेशन कन्फ़र्म करने देते हैं.”
एजेंट का आउटपुट ऐसा डेटासेट होता है जो फ़ाइनेंस वर्कफ़्लो में तुरंत काम आ सके. जो काम पहले घंटों लेता था, अब रातों-रात मिल जाता है—नोट्स के साथ और वेरिफ़िकेशन के लिए तैयार. एक्सपर्ट्स अब भी प्रोसेस का हिस्सा रहते हैं, लेकिन उनका काम डेटा टाइप करने से बदलकर सही फ़ैसला लेने पर फोकस हो जाता है.
“सबसे कमाल की बात यह है कि ज़्यादातर मुश्क़िल काम AI संभाल लेता है. हमारी टीमें सुबह उठकर ऐसे डेटा के साथ काम शुरू करती हैं जो पहले से तैयार और रिव्यू के लिए रेडी होता है.”
यह डिज़ाइन भरोसा दिलाता है: प्रोफेशनल्स को बड़े पैमाने पर स्ट्रक्चर्ड और लॉजिक-आधारित डेटा मिलता है—लेकिन आख़िरी फ़ैसला उनकी विशेषज्ञता पर ही टिका रहता है.
नतीजे:
- तेज़ टर्नअराउंड. पहले जो घंटों लगता था, अब आधे समय में, रातों-रात तैयार हो जाता है.
- ज़्यादा कैपेसिटी. बिना टीम बढ़ाए हज़ारों कॉन्ट्रैक्ट्स की प्रोसेसिंग हो जाती है.
- स्मार्ट कॉन्टेक्स्ट. नॉर्मल से हटकर टर्म्स, क्लियर रीजनिंग और रेफ़रेंसेज़ के साथ हाइलाइट कर दिए जाते हैं.
- क्वेरी-फ़्रेंडली रिज़ल्ट्स. डेटा वेयरहाउस में टेबल फ़ॉर्मेट से एनालिसिस आसान हो जाता है.
हर रिव्यू के साथ मिलने वाला ह्यूमन फ़ीडबैक एजेंट को और तेज़ व सटीक बनाता है.
“जैसे-जैसे OpenAI बढ़ रहा है, हमारा बढ़ना भी केवल इसी टूल से ही मुमकिन है.”, Wei An कहते हैं. इसके बिना कॉन्ट्रैक्ट्स बढ़ने के साथ टीम को भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ाना पड़ता. ये सिस्टम हमें एक छोटी टीम रखते हुए गज़ब की ग्रोथ संभालने देता है.”
अब ये सिस्टम सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट्स ही नहीं, बल्कि खरीद, कंप्लायंस और महीने के आख़िरी अकाउंट क्लोज़ तक संभाल सकता है. नियम एक ही लागू होता है: बार-बार होने वाला काम ऑटोमेट करो, लेकिन फ़ैसला लेने का कंट्रोल इंसानों के पास रहे.
इंजीनियर्स इस के बारे में कहते हैं “मैन्युअल काम को पहले ही निपटा दिया जाना,” न कि फ़ैसलों का बदला जाना. फ़ाइनेंस टीम अब भी नंबरों की कहानी लिखती है; एजेंट बस ये देखता है कि उनका दिन फ़ालतू मेहनत में न बीते.
जो शुरुआत में सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट्स की समस्या हल करने के लिए किया गया था, अब वो फ़ाइनेंस में काम करने का एक नया स्टाइल बन गया है. डेटा रातों-रात तैयार हो जाता है. और प्रोफ़ेशनल्स अपना ध्यान सिर्फ़ एनालिसिस और स्ट्रैटेजी पर रखते हैं. लीडर्स टीम को बिना बड़ा किए भी ग्रोथ को निश्चिंत हो कर संभाल सकते हैं.
कॉन्ट्रैक्ट डेटा एजेंट ये दिखाता है कि AI कैसे ज़िम्मेदारी से, हाई-स्टेक और रेगुलेटेड काम को और अच्छा बना सकता है. ये दिखाता है कि जब एक्सपर्ट्स इंटेलिजेंट सिस्टम्स के साथ हाथ मिलाते हैं, तो क्या-क्या मुमकिन होता है: ज़्यादा लेवरेज, ज़्यादा भरोसा, और सबसे अहम काम पर ही लगे ज़्यादा समय.


