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OpenAI

1 जून 2026

सुरक्षा

"डेटा सेंटर बैंडवैगन" कैंपेन: US को निशाना बनाने वाली इनफ़्लुएंस ऐक्टिविटी

OpenAI ने ऐसे अकाउंट्स के एक क्लस्टर को बैन किया, जिसके PRC से जुड़े होने की संभावना थी और जो AI का इस्तेमाल करके US डेटा सेंटर्स और AI इंफ़्रास्ट्रक्चर की बुराई करने वाला सोशल मीडिया कॉन्टेंट बना रहा था.

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यह केस स्टडी पहली बार OpenAI की जून 2026⁠(एक नई विंडो में खुलेगा) की उस रिपोर्ट में पब्लिश हुई थी, जिसमें US में AI से जुड़ी बहसों को निशाना बनाने वाले PRC से संबंधित इनफ़्लुएंस ऑपरेशन्स के बारे में बताया गया था.

ऐक्टर

हमने ChatGPT अकाउंट्स के एक क्लस्टर को बैन किया, जिसके चीन से शुरू होने की संभावना थी और जो एक छिपे हुए इनफ़्लुएंस ऑपरेशन के लिए सोशल मीडिया कॉन्टेंट बनाने में ChatGPT का इस्तेमाल कर रहा था. वे ChatGPT को सिंप्लिफ़ाइड चाइनीज़ में प्रॉम्प्ट देते थे, लेकिन बार-बार अंग्रेज़ी और चाइनीज़ में ऐसा कॉन्टेंट माँगते थे जिसमें वे अलग-अलग बैकग्राउंड वाले अमेरिकियों की तरह दिखें. यह कॉन्टेंट कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर पोस्ट किया गया. क्योंकि चीन से हमारे मॉडल्स का एक्सेस नहीं किया जा सकता है, इसलिए उन्होंने हमारे प्लेटफ़ॉर्म को एक्सेस करने के लिए कुछ VPN का इस्तेमाल किया.

इन अकाउंट्स को चलाने वाले लोग शायद एक प्राइवेट चाइनीज़ टेक्नोलॉजी कंपनी की सोशल मीडिया ऑपरेशन्स टीम का हिस्सा थे. यह कंपनी चीन में प्रांत-स्तर के सरकारी क्लाइंट्स के लिए काम कर रही थी. इनकी ऐक्टिविटी ऐसे कमर्शियल इकोसिस्टम जैसी लग रही थी, जो पार्टी-सरकार की ज़रूरतों के हिसाब से पब्लिक ओपिनियन को दिशा देने का काम⁠(एक नई विंडो में खुलेगा) करती है. ChatGPT पर अपलोड की गई उनकी एक अलग रिपोर्ट में पब्लिक ओपिनियन पर असर डालने के उनके मकसद और तरीके बताए गए थे. इसमें ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाने की प्लानिंग भी थी, जो प्लेटफ़ॉर्म के डिटेक्शन सिस्टम्स से बच सकें.

व्यवहार

हमने जिन अकाउंट्स को बैन किया, वे दो तरह की ऑडियंस को इनफ़्लुएंस करने की कोशिश कर रहे थे. उनका मुख्य निशाना US की ऑडियंस थी. वे अंग्रेज़ी में छोटे कमेंट्स और इमेज बनाते थे, जिनमें दावा किया जाता था कि डेटा सेंटर्स और AI ऐप्लिकेशन्स से बिजली की माँग बढ़ रही है और आम अमेरिकियों के लिए खर्च बढ़ रहा है.

उदाहरण के लिए, उन्होंने एक भरोसेमंद रीजनल अखबार की रिपोर्टिंग के आधार पर पावर ग्रिड ऑपरेटर की बिजली की कीमतों पर कॉमिक स्ट्रिप्स माँगीं. उन्होंने ChatGPT से ऐसे कमेंट्स बनाने को कहा जिनका फ़ोकस पीक बिजली की माँग की वजह से बिजली की बढ़ती कीमतों पर हो. इसमें नई माँग को डेटा सेंटर्स और AI ऐप्लिकेशन्स से जोड़ा गया और यह बात रखी गई कि आखिर में इसका खर्च आम घरों को उठाना पड़ता है. ये कमेंट्स और इमेज X पर ऐसे कई अकाउंट्स से पोस्ट किए गए जो शायद असली नहीं थे. इनके साथ पावर ग्रिड ऑपरेटर की बिजली की कीमतों और डेटा सेंटर्स की बिजली की माँग से जुड़ी भरोसेमंद न्यूज़ रिपोर्ट्स के लिंक भी शेयर किए गए.

AI से बना कॉन्टेंट X पर #capacityauction, #datacentersuccess और #datacenters जैसे हैशटैग्स के साथ पोस्ट किया गया. उन्होंने ChatGPT का इस्तेमाल इमेज एडिट करने के लिए भी किया. आम बिजली मार्केट वाली इमेज में टेक्स्ट जोड़कर यह बात फ़ैलाई गई कि AI इंफ़्रास्ट्रक्चर का खर्च आम लोग उठा रहे हैं.

Screenshots of X posts with text and images generated by ChatGPT.

ChatGPT से बनाए गए टेक्स्ट और इमेज वाले X पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट्स.

इस क्लस्टर का दूसरा निशाना विदेशों में रहने वाले चीनी लोग थे. यह चीन सरकार की प्रायोरिटी को आगे बढ़ाने में उसकी भूमिका से मेल खाता है. उन्होंने चीनी सरकार के आलोचक ली यिंग, जिन्हें "टीचर ली" के नाम से भी जाना जाता है, के बारे में पब्लिक जानकारी माँगी. फिर ChatGPT से उनके खिलाफ़ छोटे अपमानजनक कमेंट्स बनाने को कहा, जिन्हें उनकी टीम के X अकाउंट @whyyoutouzhele पर पोस्ट किया जाना था. हमारी पिछली थ्रेट रिपोर्ट⁠ में हमने बताया था कि चीन की लॉ एनफ़ोर्समेंट से जुड़े एक व्यक्ति ने भी ली को इसी तरह ऑनलाइन परेशान किया था. इस मामले में हमारे मॉडल्स ने ली के खिलाफ़ भड़काऊ या निजी हमले वाला कॉन्टेंट बनाने से मना कर दिया. उन्होंने लू यीहेंग, शू ची और X अकाउंट @SydneyDaddy1 जैसे दूसरे चीनी पॉलिटिकल कमेंटेटर्स को भी ऑनलाइन परेशान करने की कोशिश की.

एक खास तरीका यह था कि ये लोग ऑनलाइन खुद को US में रहने वाले चीनी इमिग्रेंट्स, वर्कर्स, स्टूडेंट्स, माँ, क्लर्क्स और इन्वेस्टर्स के तौर पर पेश करते थे. उनका मकसद US में रहने वाले एक पूर्व चीनी पुलिस अधिकारी को अमेरिका की आलोचना करने और उसके "डार्क साइड" के बारे में बोलने के लिए बढ़ावा देना था. उन्होंने ChatGPT से एक YouTuber के लिए ऐसे मैसेज बनाने को कहा, जिनमें उस पूर्व अधिकारी को U.S. पॉलिसी की कमियों पर बोलने के लिए कहा जाए. यह एक नया तरीका लगा, जिसमें US में रहने वाले चीनी इमिग्रेंट्स की नकली पहचान का इस्तेमाल करके किसी इनफ़्लुएंसर को US की आलोचना वाला कॉन्टेंट बनाने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा था.

सोशल मीडिया कॉन्टेंट बनाने के अलावा, इन अकाउंट्स ने अपने वर्कफ़्लो को ऑटोमेट करने और बड़े स्तर पर चलाने के लिए भी ChatGPT की मदद ली. इसमें लॉगिन ऑटोमेट करने और कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर इंटरैक्शन्स मैनेज करने के लिए कोड माँगना शामिल था. उन्होंने ChatGPT को टेक्स्ट प्रोसेसिंग टूल की तरह भी इस्तेमाल किया, जैसे यूज़रनेम निकालना, उनके आगे X या YouTube लिंक जोड़ना, हाइपरलिंक्स हटाना और वर्कशीट्स के लिए डेटा फ़ॉर्मैट करना.

Original data center image.

डेटा सेंटर की असली इमेज.

AI-edited image posted on X by a likely inauthentic account.

AI से एडिट की गई इमेज, जिसे X पर शायद किसी नकली अकाउंट ने पोस्ट किया.

प्लेटफ़ॉर्म ऑपरेशन्स

इन अकाउंट्स ने ChatGPT से वर्क रिपोर्ट्स बनाने, उन्हें बेहतर करने और एडिट करने को कहा. इन रिपोर्ट्स से सोशल मीडिया पर उनकी ऐक्टिविटी से जुड़े ऑपरेशनल सिक्योरिटी फ़ैक्टर्स और प्लेटफ़ॉर्म डिटेक्शन सिस्टम्स के बारे में उनकी समझ सामने आई. उनके मकसदों में लंबे समय तक चलने वाले और भरोसेमंद दिखने वाले अकाउंट्स बनाना, जिन इलाकों में पहुँचना चाहते थे, वहाँ के लिए आकर्षक दिखाई देने वाले कॉन्टेंट बनाना, और प्लेटफ़ॉर्म की संभावित कार्रवाई का पहले से अंदाज़ा लगाकर अकाउंट्स को लंबे समय तक चालू रखना शामिल था.

एक रिपोर्ट खास तौर पर Facebook ऑपरेशन्स पर फ़ोकस करती थी. इसमें ऐसी नकली पहचान बनाने पर ज़ोर था जो असली, भरोसेमंद और रोज़मर्रा की ज़िंदगी वाली लगें. अकाउंट की शुरुआती पहचान बनाने के लिए लाइफ़स्टाइल, करंट अफ़ेयर्स, कमेंट्री और प्रोफ़ेशनल कॉन्टेंट इस्तेमाल करने की बात भी थी. साथ ही, अलग-अलग अकाउंट्स के बीच इंटरैक्शन का इस्तेमाल करके किसी बात को ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने की प्लानिंग थी, लेकिन ऐसा करते हुए इंटरैक्शन को ऑर्गेनिक दिखाना था. इससे पता चलता है कि US सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर लंबे समय तक मौजूद रहने के लिए उनका वर्कफ़्लो काफ़ी एडवांस था और इन ऑपरेशन्स की प्लानिंग में AI का भी इस्तेमाल किया जा रहा था.

उसी रिपोर्ट से पता चलता है कि उन्होंने अपनी पहुँच बढ़ाने और अकाउंट्स पर कार्रवाई का रिस्क कम करने के लिए Facebook प्लेटफ़ॉर्म का काफ़ी गहराई से ऐनालिसिस किया था. उन्होंने चर्चा की कि Facebook के कॉन्टेंट इकोसिस्टम, ग्रुप्स, पेज, हैशटैग्स, ऐडवर्टाइज़िंग टूल्स, रिकमेंडेशन सिस्टम्स और रिपोर्टिंग मैकेनिज़्म्स का इस्तेमाल करके समय के साथ इनफ़्लुएंस कैसे बढ़ाया जा सकता है और नई ऑडियंस तक कैसे पहुँचा जा सकता है. उन्होंने इसे डुअल-ट्रैक अप्रोच के तौर पर रखा, जिसमें ऑर्गेनिक एंगेजमेंट और Facebook ऐड्स को साथ इस्तेमाल करना था और टॉपिक्स, फ़ॉर्मैट्स व ऑडियंस पर बार-बार टेस्ट करना था. उन्होंने अकाउंट सेफ़्टी, बैकअप अकाउंट्स बनाने और अलग-अलग अकाउंट्स की ऑपरेशनल ऐक्टिविटी अलग रखने पर भी ज़ोर दिया, ताकि प्लेटफ़ॉर्म उनके बीच कोऑर्डिनेशन को पकड़ न सके.