ChatGPT for Academic Researchers के साथ साइंटिफ़िक रिसर्च को तेज़ करना
हम 100,000 वैज्ञानिकों, गणितज्ञों और इंजीनियरों को अपने फ़्रंटियर मॉडल्स और टूल्स मुफ़्त दे रहे हैं.
10 अगस्त, 2026 का अपडेट: अब नए आवेदकों को वेटलिस्ट में रखा जाएगा. हम पहले फ़ेज़ में मिले 13,000 से ज़्यादा आवेदनों को रिव्यू कर रहे हैं—इन आवेदनों में 65,000 तक रिसर्चर सीटों के लिए आवेदन शामिल हैं—इनमें से शुरुआती 10,000 सीटों के कोहोर्ट को योग्य आवेदकों के बीच लॉटरी के ज़रिए चुना जाएगा. जो लोग इस कोहोर्ट में नहीं चुने जाएँगे, वे आगे होने वाले सिलेक्शन राउंड्स के लिए भी योग्य रहेंगे. आवेदन इस फ़ॉल में बाद में फिर से खोले जाएँगे. इससे हमें प्रोग्राम को आगे बढ़ाते हुए रिसर्चर्स के पहले ग्रुप को बेहतर तरीके से सपोर्ट करने पर फ़ोकस करने में मदद मिलेगी.
हम मानते हैं कि फ़्रंटियर AI का फ़ायदा सिर्फ़ कुछ कंपनियों या अच्छी फ़ंडिंग वाले लैब्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए. साइंटिफ़िक प्रोग्रेस इस बात पर निर्भर करती है कि रिसर्चर्स सही सवाल पूछें, नए आइडियाज़ को परखें और पहले की गई खोजों को आगे बढ़ाएँ. हमारा काम उनके हाथों में ताकतवर टूल्स देना है—और उनके साथ मिलकर ऐसे मॉडल्स तैयार करना है जो उनकी रिसर्च को तेज़ तो करें, लेकिन कंट्रोल भी उनके हाथों में ही रहे.
हम 'अकादमिक रिसर्चर्स के लिए ChatGPT' प्रोग्राम शुरू कर रहे हैं. इसके तहत चुने गए अकादमिक संस्थानों के 100,000 रिसर्चर्स को हमारे फ़्रंटियर मॉडल्स का फ़्री एक्सेस मिलेगा. यह प्रोग्राम साइंस, मैथेमेटिक्स और इंजीनियरिंग के रिसर्चर्स को एडवांस्ड प्रॉब्लम्स पर काम करने, नई खोजों को तेज़ करने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करेगा. इसमें ग्रांट एप्लिकेशन तैयार करने से लेकर हाइपोथिसिस टेस्ट करने तक के काम शामिल हैं.
इस गर्मी में हम 10,000 रिसर्चर्स के साथ शुरुआत कर रहे हैं. Institute for Advanced Study (IAS) और École normale supérieure (ENS) जैसे संस्थानों में एक्सेस पहले से है. हम 2027 तक इसे 1,00,000 रिसर्चर्स तक पहुँचाने की योजना बना रहे हैं. शुरुआत में इस प्रोग्राम में शामिल लोगों को GPT‑5.6 Sol Pro समेत हमारे फ़्रंटियर मॉडल्स का एक्सेस मिलेगा और वे अपने संस्थान से अधिकतम चार सहयोगियों को इनवाइट कर सकेंगे. वर्कस्पेस में बिज़नेस-ग्रेड की प्राइवेसी और सुरक्षा व्यवस्थाएँ होंगी. डिफ़ॉल्ट तौर पर मॉडल्स की ट्रेनिंग में उनके डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. रिसर्चर्स जीनोमिक एनालिसिस और प्रोटीन मॉडलिंग से लेकर लिटरेचर के रिव्यू, ग्रांट लिखने और पब्लिशिंग जैसे कई तरह के कामों में टूल्स और स्किल्स का इस्तेमाल कर पाएँगे.
इस प्रोग्राम में ट्रेनिंग, प्रैक्टिकल सपोर्ट और दूसरे रिसर्चर्स से सीखने व हमारे साथ फ़ीडबैक शेयर करने के मौके भी शामिल हैं.
जिन संस्थानों के पास ChatGPT Edu है, वहाँ इस प्रोग्राम के तहत मिलने वाला मुफ़्त एक्सेस उसी संस्थान के वर्कस्पेस के ज़रिए दिया जाएगा. ChatGPT Edu के साथ ही उच्च शिक्षा में OpenAI क्या सहायता करता है, इस बारे में और जानें.
ChatGPT for Academic Researchers 2027 तक बाहरी साइंटिफ़िक रिसर्च और नई खोजों को बढ़ावा देने के लिए OpenAI की $25 करोड़ से ज़्यादा की प्रतिबद्धता का हिस्सा है. इसमें NextGenAI के साथ रिसर्च संस्थानों के लिए $5 करोड़ की पहल और Department of Energy के Genesis Mission के साथ हमारा सहयोग भी शामिल है, जिसके तहत नेशनल लैबोरेटरीज़ और यूनिवर्सिटीज़ के रिसर्चर्स तक फ़्रंटियर AI पहुँचाया जा रहा है. इन सभी पहलों में हमारे इस भरोसे को दिखाती है कि जब ज़्यादा रिसर्चर्स के पास अपने आइडियाज़ पर काम करने के लिए बेहतर टूल्स होते हैं, तो साइंटिफ़िक प्रोग्रेस और तेज़ होती है.
AI उम्मीद से कहीं ज़्यादा तेज़ी से रिसर्च का एक ताकतवर टूल बनता जा रहा है. हर हफ़्ते लगभग 13 लाख लोग एडवांस्ड साइंस और मैथ्स के लिए ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं, जिससे करीब 84 लाख मैसेज जेनरेट होते हैं.
इस बदलाव का सबसे साफ़ असर मैथ्स में दिखाई दे रहा है. पिछले छह महीनों में AI कुछ चुनिंदा सवालों तक सीमित रहने के बजाय मैथ्स से जुड़ी रिसर्च का नियमित हिस्सा बन गया है. अब बढ़ती संख्या में रिसर्च पेपर्स में ChatGPT के योगदान का ज़िक्र किया जा रहा है, जो दिखाता है कि रिसर्चर्स इन टूल्स को कितनी तेज़ी से अपना रहे हैं.
* यह अधूरा महीना है; फ़िलहाल फ़ुल-टेक्स्ट इंडेक्स में 21 जुलाई तक का डेटा है.
रिसर्चर्स साइंटिफ़िक काम के लगभग हर स्टेज में ChatGPT और Codex का इस्तेमाल कर रहे हैं. ChatGPT उन्हें आइडियाज़ पर गहराई से सोचने, नई जानकारी हासिल करने, हाइपोथिसिस बनाने और अपनी फ़ाइंडिंग्स बेहतर तरीके से शेयर करने में मदद करता है. वहीं Codex रिसर्च को आगे बढ़ाने और औपचारिक एनालिसिस में मदद करता है, जिसमें कोड लिखना और नतीजों को एनालाइज़ करना भी शामिल है.
21 जून–20 जुलाई 2026 के दौरान, साइंटिफ़िक वर्कफ़्लो कैटेगरी और प्रोडक्ट के आधार पर साइंटिफ़िक रिसर्च की रिक्वेस्ट्स का हिस्सा
रिसर्च में भी ये रुझान दिखाई दे रहे हैं. फ़िज़िसिस्ट रोजेरियो जोर्जे और उनकी टीम AI की मदद से ओपन-सोर्स फ़्यूज़न रिसर्च सॉफ़्टवेयर तैयार कर रही है, जिसका इस्तेमाल इंडस्ट्री और नेशनल लैबोरेटरीज़ फ़्यूज़न एनर्जी डिवाइसेज़ डिज़ाइन करने के लिए करती हैं. वहीं थ्योरिटिकल कंप्यूटर साइंस में बार्ना साहा, यिनझान श्यू और क्रिस्टोफ़र ये ने GPT‑5.5 Pro की मदद से एक ऐसा प्रूफ़ तैयार किया, जिसने यह दिखाया कि कंप्यूटर हाई-डायमेंशनल ज्योमेट्री की समस्याओं को कितने असरदार तरीके से हल कर सकते हैं. इसके बाद उन्होंने खुद उन नतीजों को वैलिडेट किया और उन्हें पहले से ज़्यादा बेहतर बनाया.
जो रिसर्चर्स इन टूल्स का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, वे ज़्यादा बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं. अपने-अपने क्षेत्र में AI का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करने वाले टॉप 20% रिसर्चर्स, बाकी साथियों के मुकाबले लगभग दोगुनी संभावना के साथ AI को ऐसे काम सौंपते हैं जिन्हें पूरा करने में चार घंटे या उससे ज़्यादा समय लगने का अनुमान होता है. उनकी लगभग 7% रिक्वेस्ट ऐसी होती हैं, जबकि उसी फ़ील्ड के अन्य रिसर्चर्स में यह आँकड़ा 3.5% है.
21 जून–20 जुलाई 2026 के दौरान, वैज्ञानिकों के AI इस्तेमाल और इंसानों को किसी काम को पूरा करने में लगने वाले अनुमानित समय के आधार पर साइंटिफ़िक रिक्वेस्ट्स का हिस्सा
हमारी रणनीति यह तय करना नहीं है कि किस साइंटिफ़िक समस्या पर काम होना चाहिए या सभी समस्याओं को खुद हल करना है. हमारा लक्ष्य रिसर्च कम्युनिटी के हाथों में बेहतर टूल्स देना है, ताकि रिसर्चर्स उन सवालों पर काम कर सकें जिन्हें वे सबसे अच्छी तरह समझते हैं.
इसमें हिस्सा लेने वाले रिसर्चर्स को ChatGPT, ChatGPT वर्क और Codex में हमारे सबसे एडवांस्ड मॉडल्स का फ़्री एक्सेस मिलेगा. लॉन्च के समय इसमें GPT‑5.6 फ़ैमिली भी शामिल होगी. साथ ही उन्हें 'डीप रिसर्च' की ज़्यादा लिमिट, बड़ा कॉन्टेक्स्ट विंडो और ज़्यादा यूसेज लिमिट भी मिलेगी. ये सभी चीज़ें अलग-अलग क्षेत्र में साइंटिफ़िक रीज़निंग, AI एजेंट से काम करवाने और पूरे रिसर्च वर्कफ़्लो को बेहतर बनाने में मदद करेंगी.
GPT‑5.6 Terra रोज़मर्रा के रिसर्च कामों के लिए क्षमता और एफिशिएंसी के बीच एक अच्छा बैलेंस देता है. GPT‑5.6 Luna हल्के-फुल्के कामों के लिए और भी तेज़ रिस्पॉन्स देता है. वहीं GPT‑5.6 Sol सबसे मुश्किल साइंटिफ़िक और मैथमैटिकल समस्याओं को हल करने के लिए बनाया गया है. रिसर्च-लेवल मैथमैटिकल रीज़निंग को मापने वाले FrontierMath Tier 4 में GPT‑5.6 Sol ने 83% स्कोर किया, जबकि GPT‑5.5 का स्कोर 72.5% था. GeneBench Pro, जो जटिल बायोलॉजिकल डेटा एनालिसिस और साइंटिफ़िक रीज़निंग को परखता है, उसमें GPT‑5.6 Sol Pro ने 31.5% टास्क सफलतापूर्वक पूरे किए.
रिसर्चर्स जेनेटिक्स, जीनोमिक्स, सीक्वेंसिंग, सिंगल-सेल एनालिसिस, प्रोटीन मॉडलिंग और ड्रग डिस्कवरी जैसे क्षेत्रों में 75 से ज़्यादा लाइफ़ साइंस स्किल्स(एक नई विंडो में खुलेगा) का इस्तेमाल कर सकते हैं. कनेक्टर्स अलग-अलग फ़ील्ड्स में रिसर्च को सपोर्ट करते हैं. इनके ज़रिए साइंटिफ़िक लिटरेचर, पब्लिक जीनोमिक और क्लिनिकल डेटाबेस, सैटेलाइट इमेजरी, कम्प्यूटेशनल नोटबुक्स, डेटा प्लेटफ़ॉर्म्स और रेफ़रेंस मैनेजर्स तक पहुँच मिलती है.

ChatGPT और Codex में मौजूद स्किल्स, कनेक्टर्स और टूल्स के कुछ उदाहरण.
Codex कोड लिखने और डीबग करने, डेटासेट्स का एनालिसिस करने और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले वर्कफ़्लोज़ बनाने में मदद कर सकता है. ChatGPT वर्क लंबे प्रोजेक्ट्स में भी मदद कर सकता है, जैसे फ़ंडिंग के मौके ढूँढना, ग्रांट की एप्लिकेशंस तैयार करना, रिसर्च के लिटरेचर को रिव्यू करना, मैन्युस्क्रिप्ट ड्राफ़्ट करना और रिसर्च के नतीजों को समझाने के लिए ज़रूरी मटीरियल तैयार करना.
AI के साथ हर रिसर्चर की शुरुआत अलग हो सकती है. कुछ लोग पहली बार इन टूल्स का इस्तेमाल करेंगे, जबकि कुछ अपने फ़ील्ड में एडवांस्ड एप्लिकेशंस बना रहे होंगे.
यह प्रोग्राम अलग-अलग अनुभव के स्तर के हिसाब से ट्रेनिंग देगा. इसमें शुरुआत करने से लेकर वर्कफ़्लो बेहतर बनाने और एडवांस्ड रिसर्च एप्लिकेशंस तक सब कुछ शामिल होगा. इसमें हिस्सा लेने वाले रिसर्चर्स को ऐसे स्पेशलिस्ट्स का सपोर्ट मिलेगा जिन्हें रिसर्च वर्कफ़्लोज़ की अच्छी समझ है. वे इन टूल्स को उनके काम में शामिल करने में भी मदद करेंगे.
जैसे-जैसे हमें पता चलेगा कि रिसर्चर्स क्या नई खोज कर रहे हैं, हम ऐसे और मौके बनाएँगे जहाँ वे अपने प्रैक्टिकल तरीके शेयर कर सकें, एक-दूसरे से सीख सकें और अलग-अलग फ़ील्ड्स में इनके इस्तेमाल को सामने ला सकें. उनका फ़ीडबैक हमें यह समझने में मदद करेगा कि हमारे मॉडल कहाँ सबसे ज़्यादा काम आते हैं, कहाँ उनकी सीमाएँ हैं और उन्हें रिसर्च कम्युनिटी के लिए और ज़्यादा अहम कैसे बनाया जा सकता है.
शुरुआती प्रोग्राम चुनिंदा अकादमिक संस्थानों के योग्य रिसर्चर्स के लिए खुला है. योग्य संस्थान(एक नई विंडो में खुलेगा) ऐसे मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी होने चाहिए जो डिग्री देते हों और जहाँ बड़े स्तर पर रिसर्च होती हो.
आवेदन करने वालों को अपने संस्थान से रिश्ते को वैरिफ़ाई करना होगा. साथ ही उन्हें अपनी मौजूदा रिसर्च और AI के साइंटिफ़िक इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी देनी होगी. मंज़ूरी मिलने के बाद हर रिसर्चर अपने संस्थान से ज़्यादा से ज़्यादा चार सहयोगियों को इनवाइट कर सकता है. हर सहयोगी को भी संस्थान से अपना रिश्ता साबित करना होगा और उसका अकाउंट प्रोग्राम के कुल अकाउंट्स की गिनती में शामिल होगा.
आवेदन आज से खुले हैं. आप योग्यता की शर्तें देख सकते हैं और यहाँ(एक नई विंडो में खुलेगा) आवेदन कर सकते हैं.


