GPT‑6 और GPT‑Live से Anima ने क्लिनिक्स का कॉल वेट 75% घटाया
Anima, OpenAI मॉडल्स की मदद से केयर टीमों की काम सँभालने की क्षमता बढ़ाता है, ताकि वे ज़्यादा मरीज़ों की ज़रूरतों पर ध्यान दे सकें.

75%+
फ़ोन पर इंतज़ार करने के समय में कमी
3.5
केस सुलझाने में लगने वाला लगभग मीडियन समय (घंटों में)
2–3×
पहले के मुकाबले आम तौर पर डॉक्यूमेंट प्रोसेस करने की क्षमता
86%
सर्वे में शामिल मरीज़ दोबारा AI असिस्टेंट Andi का इस्तेमाल करना चाहेंगे
मरीज़ों की रिक्वेस्ट्स, क्लिनिकल लेटर्स और कंसल्टेशन नोट्स जैसी चीज़ों को केयर टीमों को रिव्यू करना होता है और उन पर ज़रूरी ऐक्शन लेना होता है. जब ऐसा काम बढ़ जाता है, तो मरीज़ों को जवाब मिलने में ज़्यादा समय लग सकता है और अहम जानकारी लंबे समय तक पेंडिंग रह सकती है.
Anima(एक नई विंडो में खुलेगा) इन सभी वर्कफ़्लो को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर लाता है. इसमें खास कामों के लिए बनाए गए AI सहयोगी मरीज़ों की मेडिकल हिस्ट्री इकट्ठा करते हैं, डॉक्यूमेंट्स प्रोसेस करते हैं और केयर टीमों के लिए क्लिनिकल नोट्स के ड्राफ़्ट तैयार करते हैं. Anima का मकसद हर व्यक्ति को उसकी ज़रूरतों के हिसाब से हेल्थकेयर उपलब्ध कराना है. कंपनी का मानना है कि मरीज़ों को उनकी ज़रूरत के मुताबिक देखभाल मिलनी चाहिए.
Anima की शुरुआत UK में हुई थी. आज यह वहाँ 1,000 से ज़्यादा क्लिनिक्स में 1.4 करोड़ से ज़्यादा मरीज़ों को सेवाएँ देता है और हर महीने 8 लाख से ज़्यादा केस प्रोसेस करता है. अब कंपनी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में भी अपना बिज़नेस बढ़ा रही है. Anima अपने डॉक्यूमेंट वर्कफ़्लो में GPT‑6 मॉडल्स और कॉल्स के लिए GPT‑Live का इस्तेमाल करता है. Anima के CEO और को-फ़ाउंडर शुन पैंग के मुताबिक, कंपनी ने सभी क्लोज़्ड-सोर्स और ओपन-सोर्स मॉडल्स की बेंचमार्क टेस्टिंग करने के बाद OpenAI को चुना.
"हमने Anima के सबसे अहम वर्कफ़्लो के लिए OpenAI को चुना, क्योंकि इसके मॉडल्स में काफ़ी बेहतर इंटेलिजेंस हैं, हर डॉलर पर ज़्यादा फ़ायदा मिलता है और कॉन्टेक्स्ट लर्निंग की मदद से इन्हें अपनी ज़रूरतों के हिसाब से काम करने के लिए गाइड किया जा सकता है."
Anima शुरू करने से पहले शुन ने क्लिनिकल ट्रेनिंग ली थी. इस दौरान उन्होंने देखा कि एक मरीज़ की असामान्य टेस्ट रिपोर्ट छह महीने तक पेंडिंग रही, जिसकी वजह से उसे ऐसा इलाज नहीं मिल पाया जो उसकी जान बचा सकता था. इससे शुन को लगा कि हेल्थकेयर में समस्या इलाज की नहीं, बल्कि सिस्टम में जानकारी के सही समय पर आगे न पहुँचने की है. उन्होंने Anima इसलिए बनाया, ताकि केयर टीमें मरीज़ों की ज़रूरतों को बेहतर तरीके से सँभाल सकें. यह प्लेटफ़ॉर्म मरीज़ों की रिक्वेस्ट्स, क्लिनिकल डॉक्यूमेंट्स और फ़ॉलो-अप से जुड़े कामों को एक ही जगह लाता है.
Anima का AI रिसेप्शनिस्ट Andi, GPT‑Live पर बनाया गया है. मरीज़ फ़ोन पर Andi को अपने लक्षण बता सकते हैं. इस दौरान Anima का अपना पॉलिसी इंजन बातचीत को पहले से तय और क्लिनिकल टीम से अप्रूव किए गए इंटेक वर्कफ़्लो के हिसाब से आगे बढ़ाता है. इसके बाद GPT‑5.4 mini सही सवालों वाला फ़ॉर्म चुनता है. फ़ॉर्म पूरा होने पर मरीज़ की मेडिकल हिस्ट्री क्लिनिक के डैशबोर्ड में एक व्यवस्थित केस के रूप में दिखती है. डॉक्टर और क्लिनिक का स्टाफ़ इसे रिव्यू करके आगे ज़रूरी ऐक्शन ले सकते हैं.
Anima के मुताबिक, Andi इस्तेमाल करने वाले क्लिनिक्स में फ़ोन पर इंतज़ार का समय 40–50 मिनट से घटकर 10 मिनट रह गया है. यानी कम-से-कम 75% की कमी आई है. Anima के मरीज़ों के सर्वे में 86% लोगों ने कहा कि वे दोबारा Andi का इस्तेमाल करना चाहेंगे. कंपनी ने पाया कि 80 और 90 साल की उम्र के लोग इसके सबसे खुश यूज़र्स में शामिल थे. शुन कहते हैं, "उन्हें वॉइस एजेंट से बात करके बहुत खुशी होती है. यह बिना थके धैर्य से उनकी बात सुनता है और बहुत विनम्रता से जवाब देता है."
Anima का Documents प्रोडक्ट GPT‑6 मॉडल्स की मदद से आने वाले क्लिनिकल डॉक्यूमेंट्स से जानकारी निकालता है. जैसे, डॉक्यूमेंट भेजने और पाने वाले की जानकारी, डॉक्यूमेंट का टाइप और उससे जुड़ी घटनाओं की तारीखें. इसके बाद कई स्टेप्स वाला प्रोसेस हर डॉक्यूमेंट को सही मरीज़ से जोड़ता है, उससे जुड़े सही क्लिनिकल कोड्स पहचानता है और क्लिनिक स्टाफ़ को रिव्यू करने के लिए अगला ऐक्शन सुझाता है.
क्लिनिकल कोडिंग सबसे मुश्किल टेक्निकल समस्याओं में से एक साबित हुई. Anima के इंजीनियरिंग लीड, माइकल स्कूपिएन कहते हैं, "लगभग 8 लाख संभावित SNOMED कोड्स हैं. इनमें से कुछ ही कोड्स का नियमित इस्तेमाल होता है, लेकिन अलग-अलग क्लिनिक्स यह तय करने के लिए अलग तरीके अपनाते हैं कि कौन-से कोड्स इस्तेमाल करने हैं."
हर क्लिनिक से सिस्टम कॉन्फ़िगर करवाने या हर कस्टमर के लिए अलग मॉडल फ़ाइन-ट्यून करने के बजाय, Anima इन-कॉन्टेक्स्ट लर्निंग का इस्तेमाल करता है. इससे मॉडल के फ़ैसलों को हर क्लिनिक के काम करने के तरीके के हिसाब से ढाला जा सकता है. इसके लिए ऐसे मॉडल्स चाहिए, जो लगातार एक ही भरोसेमंद तरीके से इंस्ट्रक्शन्स फ़ॉलो कर सकें.
"OpenAI के सभी मॉडल्स इंस्ट्रक्शन्स बहुत अच्छी तरह फ़ॉलो करते हैं. इन्हें अपनी ज़रूरतों के हिसाब से काम करने के लिए गाइड करना आसान है और ये लगातार उसी हिसाब से भरोसेमंद तरीके से काम करते हैं."
Anima के मुताबिक, जो क्लिनिक्स पहले एक घंटे में लगभग 15 डॉक्यूमेंट्स प्रोसेस करते थे, वे अब आम तौर पर 30 से 45 डॉक्यूमेंट्स प्रोसेस कर रहे हैं. सबसे अच्छी परफ़ॉर्मेंस वाले क्लिनिक्स एक घंटे में 45 से 60 डॉक्यूमेंट्स प्रोसेस करते हैं. शुन कहते हैं, "हमने देखा है कि Anima अपनाने के कुछ ही दिनों में क्लिनिक्स ने 1 लाख से ज़्यादा पेंडिंग डॉक्यूमेंट्स प्रोसेस कर लिए. इसका मतलब है कि अहम अपडेट्स और दवाओं में हुए बदलावों की जानकारी महीनों तक पेंडिंग रहने के बजाय तुरंत डॉक्टरों और दूसरे क्लिनिकल स्टाफ़ तक पहुँच जाती है."
जब मरीज़ अपनी सेहत से जुड़ी अहम जानकारी देते हैं, तो डॉक्टरों को उनकी बात सुनने और मेडिकल रिकॉर्ड के लिए नोट्स बनाने, दोनों पर ध्यान देना पड़ता है. Anima ने GPT 5.6 Luna की मदद से अपना Scribe प्रोडक्ट बनाया है. यह कंसल्टेशन ट्रांसक्रिप्ट्स को स्ट्रक्चर्ड क्लिनिकल नोट्स में बदलता है. फिर उसी क्लिनिकल जानकारी का इस्तेमाल करके रेफ़रल लेटर्स और मरीज़ों के लिए फ़ॉलो-अप मैसेज के ड्राफ़्ट तैयार करता है.

अब डॉक्टर पूरे अपॉइंटमेंट के दौरान टाइप करने के बजाय मरीज़ पर ज़्यादा ध्यान दे सकते हैं. Anima के मुताबिक, जिन कंसल्टेशन नोट्स को लिखने में पहले कई मिनट लगते थे, उनके ड्राफ़्ट अब कुछ ही सेकंड में रिव्यू के लिए तैयार हो जाते हैं. इसी तरह, जिन रेफ़रल लेटर्स को तैयार करने में आम तौर पर 5 से 15 मिनट लगते थे, उनके ड्राफ़्ट भी कंसल्टेशन और मरीज़ के रिकॉर्ड के आधार पर कुछ ही सेकंड में तैयार किए जा सकते हैं. इसके बाद डॉक्टर या क्लिनिकल स्टाफ़ इन्हें रिव्यू कर सकते हैं.
शुन कहते हैं, "कंसल्टेशन के कुछ ही समय बाद मरीज़ों को साफ़ और आसानी से समझ आने वाले फ़ॉलो-अप मैसेज मिल जाते हैं. इससे उनकी चिंता कम होती है और उन्हें डॉक्टर की बताई बातें बेहतर याद रहती हैं. हमें अक्सर सुनने को मिलता है कि अब डॉक्टर रात 8 या 9 बजे तक काम करने के बजाय समय पर अपना काम पूरा कर लेते हैं."
Anima का मकसद हर व्यक्ति को उसकी ज़रूरतों के हिसाब से हेल्थकेयर उपलब्ध कराना है. इसके लिए केयर टीमों के पास ज़रूरी जानकारी, समय और काम सँभालने की क्षमता होनी चाहिए, ताकि वे मरीज़ के पूरे इलाज के दौरान उसकी ज़रूरतों को समझ सकें और सही कदम उठा सकें.
OpenAI मॉडल्स के साथ Anima का काम इस मकसद को पूरा करने में मदद कर रहा है. Andi फ़ोन पर मरीज़ों से जानकारी इकट्ठा करता है और उसे स्ट्रक्चर्ड रिक्वेस्ट्स में बदलता है, जिन पर स्टाफ़ आगे के ऐक्शन ले सकता है. Documents टीमों को आने वाली क्लिनिकल जानकारी प्रोसेस करने में मदद करता है. वहीं, Scribe क्लिनिकल नोट्स और फ़ॉलो-अप मैसेज के ड्राफ़्ट तैयार करता है, जिन्हें डॉक्टर और दूसरा क्लिनिकल स्टाफ़ रिव्यू कर सकते हैं.
Anima के मुताबिक, उसके प्लेटफ़ॉर्म पर ज़्यादातर केस 24 घंटों के अंदर सुलझा दिए जाते हैं. केस सुलझाने का मीडियन समय लगभग 3.5 घंटे है. शुन कहते हैं, "OpenAI के मॉडल्स की मदद से हम UK में 1.4 करोड़ मरीज़ों की देखभाल में बड़ा बदलाव ला रहे हैं. यह मरीज़ों और क्लिनिक्स, दोनों के लिए बेहद अहम है."
Anima आज केयर टीमों को मरीज़ों की देखभाल के लिए ज़्यादा समय देता है. साथ ही, भविष्य के लिए इलाज के नए तरीके और सर्विसेज़ तैयार करने में उनकी मदद करता है.


