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OpenAI

8 जून 2026

कंपनी

सभी के फ़ायदे के लिए बनाया गया: हमारा प्लान

सैम ऑल्टमैन और जैकब पचॉकी द्वारा

लोड किया जा रहा है...

हर कुछ पीढ़ियों में, कोई नई टेक्नोलॉजी सब कुछ बदल देती है.

ज़रा सोचिए कि 1920 के दशक में अमेरिका के किसी ग्रामीण कस्बे में बिजली पहुँची. बिजली की लाइनें आने से पहले, रोज़मर्रा की ज़िंदगी कुछ शारीरिक सीमाओं से बंधी थी: जैसे पानी ढोना, हाथ से कपड़े धोना, बर्फ़ की मदद से खाना सुरक्षित रखना और सूरज ढलते ही दिन का ज़्यादातर काम ख़त्म कर लेना. बिजली ने रातों-रात हर घर को नहीं बदल दिया और इसके कई फ़ायदे लोगों तक एक समान तौर से नहीं पहुँचे. लेकिन जैसे-जैसे बिजली की सुविधा बढ़ी, आम ज़िंदगी बदल गई. रात में रोशनी होने से दिन का समय बढ़ गया. इलेक्ट्रिक पंप, घरेलू उपकरण और रेफ़्रिजरेशन ने रोज़मर्रा के कुछ सबसे मुश्किल कामों को आसान बना दिया. रेडियो ने सैकड़ों मील दूर की ख़बरें, संगीत और लोगों से जुड़ाव को घरों और सामुदायिक जगहों तक पहुँचाया.

बिजली का पहला फ़ायदा तो व्यावहारिक था, लेकिन इसका ज़्यादा गहरा असर उन नई संभावनाओं से पड़ा जो इसके इस्तेमाल के साथ खुलीं. समय के साथ कई नई संभावनाएँ सामने आईं; मशीन और कंप्यूटर ने चिकित्सा, इंजीनियरिंग और कई अन्य क्षेत्रों में प्रगति को बहुत तेज़ी दी. 20वीं सदी के आख़िर तक औसत उम्र 20 साल से ज़्यादा बढ़ गई थी और महंगाई के हिसाब से तय औसत आय लगभग तीन गुना हो गई थी. इन सुधारों में हेल्थकेयर, साफ़-सफ़ाई और जीवन स्तर में हुई तरक्की का बड़ा हाथ था; इनमें से कई सुधार बड़े पैमाने पर बिजली पहुँचाने और उससे जुड़ी तकनीकी तरक्की की वजह से मुमकिन हो पाए या तेज़ी से आगे बढ़े.

AI के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. AI जल्द ही कमाल की चीज़ें करने के काबिल हो जाएगा. लेकिन असल बात सिर्फ़ टेक्नोलॉजी की नहीं है. असल बात यह है कि लोग इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं. यह किसी को मेडिकल बिल समझने, कोई नया हुनर सीखने, छोटा बिज़नेस शुरू करने, बुज़ुर्ग माता-पिता की देखभाल करने, कानूनी या फ़ाइनेंशियल फ़ैसले को समझने, किसी आइडिया को असल रूप देने या कोई वैज्ञानिक खोज करने में मदद कर सकता है.

हालांकि रात में रौशनी के जादू का असर भी बहुत जल्दी ख़त्म हो गया, लेकिन लोगों ने इसका जो इस्तेमाल किया, वह जारी रहा. और क्योंकि समय के साथ ख़ुशहाली लाने का एक भरोसेमंद ज़रिया टेक्नोलॉजी रही है, इसलिए हमारा मानना है कि AI हर किसी के लिए उपलब्ध होना चाहिए, ताकि वे अपनी ज़रूरत के हिसाब से, जहाँ और जैसे चाहें, इसका इस्तेमाल कर सकें.

वह भविष्य अपने-आप नहीं आएगा. बदलाव लाने वाली तकनीकें या तो ताकत को कुछ ही लोगों के हाथों में केंद्रित कर सकती हैं, या फिर उसे व्यापक बना सकती हैं. वे कुछ लोगों के लिए ज़िंदगी आसान बना सकती हैं, या फिर बहुत से लोगों के लिए मौके बढ़ा सकती हैं. हमारा नज़रिया इस सोच पर आधारित है कि AI को लोगों के लिए काम करना चाहिए: उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने में मदद करनी चाहिए, उनकी क्षमताएँ बढ़ानी चाहिए और इस टेक्नोलॉजी के फ़ायदों को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाना चाहिए.

हमारा पहला कमिटमेंट मानवता की सेवा में AI बनाना है. इसका मतलब है कि हम बड़े पैमाने पर लोगों को सशक्त बनाना चाहते हैं, न कि यह देखना चाहते हैं कि ताकत कुछ ही कंपनियों, सरकारों या व्यक्तियों के हाथों में केंद्रित हो. हमारा मानना है कि एक सुरक्षित भविष्य वह है जिसमें शक्ति व्यापक तौर से बंटी हो, ताकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा एक मज़बूत इकोसिस्टम बनाने में भाग ले सके.*

हम AI को लेकर अच्छी उम्मीद रखते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि यह इंसानी क्षमता और समृद्धि को बढ़ा सकता है. लेकिन हम इससे जुड़े ख़तरों को लेकर भी पूरी तरह जागरूक हैं. ताकतवर सिस्टम का सुरक्षित होना, इंसानी इरादों के हिसाब का होना और इंसानी कंट्रोल में रहना ज़रूरी है. OpenAI में हमारा मकसद यह पक्का करना है कि AGI से पूरी इंसानियत को फ़ायदा हो इसका मतलब है ऐसे सिस्टम बनाना जो लोगों को अपनी पसंद के काम ज़्यादा करने में मदद करें, न कि ऐसे सिस्टम जो यह तय करने में इंसानी समझ की जगह ले लें कि क्या मायने रखता है.

हम ऐसा भविष्य नहीं चाहते जहाँ सब कुछ पूरी तरह से ऑटोमेटेड हो. यह असंतोषजनक और ख़तरनाक होगा. AI को लोगों के लक्ष्यों को पाने में उनकी मदद करनी चाहिए, न कि उन्हें उन लक्ष्यों से दूर करना चाहिए. जैसे-जैसे AI सिस्टम ज़्यादा काबिल होते जा रहे हैं, इंसानों की भूमिका और भी अहम होती जा रही है: दिशा तय करना, समझौते करना, सही फ़ैसले लेना और काम में मूल्य, पसंद, देखभाल और ज़िम्मेदारी को शामिल करना.

लोगों के लिए एक अहम और लंबे समय तक चलने वाली भूमिका यह तय करना होगी कि क्या करना सही है.

हमारा मानना है कि AI द्वारा AI रिसर्च करना ही आने वाले कुछ सालों में तरक्की की रफ़्तार तय करने वाला अहम कारक होगा. यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि 'अलाइनमेंट' अपने आप में रिसर्च की एक मुश्किल समस्या है. तेज़ी से और गहराई से तरक्की करने के लिए, हमारे रिसर्चर्स को ऐसे AI सिस्टम की ज़रूरत होगी जो आइडिया को टेस्ट करने, गलतियाँ खोजने, दूसरे विकल्पों को आज़माने और हमारे साथ मिलकर काम को बेहतर बनाने में मदद कर सकें.

लेकिन तेज़ी से होती तकनीकी प्रगति इंसानी फ़ैसले और लोगों के बीच तालमेल को और भी ज़रूरी बनाती है, न कि कम. भविष्य को सिर्फ़ सबसे काबिल सिस्टम बनाने वाली कंपनियाँ ही नहीं, बल्कि लोग, संस्थाएँ और समाज को मिलकर तय करना चाहिए.

जैसे-जैसे अत्याधुनिक AI का विकास हो रहा है, हमें उम्मीद है कि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर तालमेल और भी ज़रूरी हो जाएगा. हमारा लंबे समय से यह मानना रहा है कि आख़िरकार एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय संगठन होना चाहिए जो विनाशकारी रिस्क को कम करने के लिए AI के प्रमुख प्रयासों में तालमेल बिठाने में मदद करे. सहयोग और सुरक्षा के शेयर्ड स्टैंडर्ड आगे बढ़ने की राह का एक अहम हिस्सा हैं, ख़ासकर इसलिए क्योंकि कमर्शियल और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले मुकाबले से जुड़े फ़ायदों से बच पाना मुश्किल होता है. ऐसी संस्था का एक मकसद यह होना चाहिए कि दुनिया मिलकर कदम उठा सके, जिसमें ज़रूरत पड़ने पर अत्याधुनिक तकनीकों के विकास की रफ़्तार को धीमा करना भी शामिल हो, ताकि समाज की मज़बूती, सुरक्षा और तालमेल भी साथ-साथ बने रहें.

फ़िलहाल OpenAI में हमारे तीन मुख्य लक्ष्य हैं

एक ऑटोमेटेड AI रिसर्चर बनाएँ—एक ऐसा AI सिस्टम जो रिसर्च के प्रोसेस को तेज़ और ज़्यादा ऑटोमेटेड बना सके, साथ ही जिसे कंट्रोल किया जा सके, जो जवाबदेह हो और लोगों से जुड़ा रहे. हमारा मानना है कि मार्च 2028 तक, हमारी रिसर्च का एक बड़ा हिस्सा AI सिस्टम और हमारे अपने रिसर्चर्स मिलकर करेंगे. अलाइनमेंट के मामले में काफ़ी तरक्की करने के लिए, हमें लगता है कि हमें ऐसे AI की ज़रूरत होगी जो हमारे साथ मिलकर लगातार सुधार करते रहें. इससे हमें पोस्ट-AGI दुनिया में बदलाव को समझने और आगे बढ़ने में मदद मिलेगी, ताकि हम सब मिलकर भविष्य की दिशा तय कर सकें.

वैज्ञानिक प्रगति, उत्पादकता और आर्थिक विकास को तेज़ करके अर्थव्यवस्था को गति दें, और साथ ही यह पक्का करें कि इसके फ़ायदे सभी तक पहुँचें. AI से पैदा होने वाली समृद्धि में सभी को सार्थक हिस्सेदारी का मौका मिलना चाहिए.

दुनिया में हर किसी को एक पर्सनल AGI दें, ताकि वे मनुष्य द्वारा बनाई गई बदलाव लाने वाली सबसे बेहतरीन टेक्नोलॉजी में से एक का फ़ायदा अपनी मर्ज़ी के हिसाब से उठा सकें.

इसे पूरा करने के लिए, हम OpenAI के तीसरे पड़ाव में प्रवेश कर रहे हैं.

OpenAI का पहला पड़ाव AGI की दिशा में रिसर्च करने के बारे में था. दूसरा पड़ाव तब शुरू हुआ जब हमारी रिसर्च असल दुनिया में काम की साबित हो गई और हम एक प्रोडक्ट कंपनी बन गए: अपने सिस्टम को लागू करना, लोगों के इस्तेमाल करने के तरीके से सीखना, और ऐसे AGI की दिशा में लगातार तरक्की करना जो सुरक्षित हो और हमारे मिशन के मुताबिक हो.

अब हम तीसरे पड़ाव में प्रवेश कर रहे हैं. अर्थव्यवस्था AI के इर्द-गिर्द नए तौर पर ढलने लगी है. अब मुख्य सवाल यह है कि एडवांस्ड AI को कैसे इतना शानदार, किफ़ायती, सुरक्षित, उपयोगी और आसान बनाया जाए कि हर व्यक्ति और संगठन इसका फ़ायदा उठा सके. अत्याधुनिक क्षमता विकसित करना काम का सिर्फ़ एक हिस्सा है. इससे भी बड़ा काम उस क्षमता को ऐसे टूल्स में बदलना है जिनका इस्तेमाल करके लोग असल में तरक्की कर सकें.

सबसे बड़ी बात यह है कि हमारा मानना है कि ताकत का व्यापक बंटवारा बेहतर भविष्य की ओर ले जाएगा. मानव इतिहास बताता है कि केंद्रित शक्ति कमज़ोरी पैदा करती है, जबकि ताकत का व्यापक बंटवारा समाज को ज़्यादा मज़बूत, अनुकूलनशील और स्वतंत्र बनाता है.

इसीलिए एक्सेस मायने रखता है. यही वजह है कि सुरक्षा, गोपनीयता, किफ़ायतीपन, ओपन इकोसिस्टम और सार्वजनिक निगरानी भी मायने रखते हैं.

AI का भविष्य ऐसा नहीं होना चाहिए जिसमें कुछ ही संस्थाओं का ज़्यादातर क्षमताओं और फ़ायदों पर कंट्रोल हो. यह भविष्य ऐसा होना चाहिए जिसमें बहुत से लोग, कंपनियाँ, समुदाय और देश चीज़ें बना सकें, फ़ायदा उठा सकें और उनके पास अधिकार हों. हमारा मानना है कि इस बदलाव में सभी की हिस्सेदारी होनी चाहिए.

अगर हम इसे सही ढंग से करते हैं, तो AI ज़्यादा प्रोडक्टिविटी, क्रिएटिविटी, वैज्ञानिक तरक्की और बहुत से लोगों के लिए आर्थिक मौकों का आधार बन सकता है, और हम अपना मिशन पूरा कर लेंगे: यह पक्का करना कि AGI से पूरी इंसानियत को फ़ायदा हो.


*AI रेज़िलिएंस का मतलब उन संगठनों, सिस्टम और लोगों से है जिन्हें समाज AI से होने वाली रुकावटों का अंदाज़ा लगाने, उनका सामना करने, उनके हिसाब से ढलने और उनसे तेज़ी से उबरने के लिए तैयार कर सकता है. उदाहरण के लिए, ऑटोमोबाइल ने समाज को बदल दिया, लेकिन वे तभी बड़े पैमाने पर फ़ायदेमंद साबित हुए जब समाजों ने उनके आस-पास सिस्टम बनाए: जैसे सीटबेल्ट, ट्रैफ़िक नियम, ड्राइविंग लाइसेंस, क्रैश टेस्टिंग और सड़क का इंफ़्रास्ट्रक्चर. मकसद लोगों को गाड़ी चलाने से रोकना नहीं था—बल्कि एक शक्तिशाली टेक्नोलॉजी को इतना मज़बूत बनाना था कि उसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सके.

लेखक

Sam Altman और Jakub Pachocki